Amit Shah Full Speech: गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ बिल को लेकर लोकसभा में अपना संबोधन दिया है। उस संबोधन में उन्होंने कई मुद्दों पर विस्तार से बात की, उन्होंने मुस्लिम पक्ष की तमाम आपत्तियों को दूर किया, उनकी तरफ से विपक्ष पर भी निशाना साधा गया। इस लंबे भाषण में अमित शाह ने कई बिंदुओं पर रोशनी डालने का काम किया।
उन्होंने अपने संबोधन में वक्फ का इतिहास बताया, कई भ्रांतियों को दूर किया। यहां 7 प्वाइंट्स में जानने की कोशिश करते हैं कि गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ बिल को लेकर क्या-क्या बोला है
- गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वक्फ का कानून दान के लिए किसी द्वारा दी हुई संपत्ति, उसका एडमिनिस्ट्रेशन अच्छे से चल रहा है या नहीं, कानून के हिसाब से चल रहा है या नहीं… या तो दान जिस चीज के लिए दिया जा रहा है, इस्लाम धर्म के लिए दिया है, गरीबों के उद्धार के लिए दिया गया है… उसके उद्देश्य के लिए उपयोग हो रहा है या नहीं हो रहा है … इसका नियमन करने का काम है।
- विपक्ष के आरोप पर जवाब देते हुए शाह ने दो टूक बोला कि ये जो भ्रम खड़ा किया जा रहा है कि यह एक्ट मुस्लिम भाइयों के धार्मिक क्रियाकलापों के अंदर उनकी दान की हुई संपत्ति के अंदर दखल करने का है… ये बहुत बड़ी भ्रांति फैलाकर माइनोरिटी को डराकर अपनी वोटबैंक खड़ी करने के लिए किया जा रहा है।
- वक्फ का इतिहास बताते हुए शाह ने कहा कि वक्फ का समकालीन अर्थ, इस्लाम के दूसरे खलीफा उमर के समय स्तित्व में आया। एक प्रकार से आज की भाषा में व्याख्या करें तो वक्फ एक प्रकार का charitable enrollment है। जहां एक व्यक्ति संपत्ति, भूमि धार्मिक और सामाजिक भलाई के लिए दान करता है, बिना उसको वापिस लेने के उद्देश्य से।
- विपक्ष की नीयत पर सवाल उठाते हुए अमित शाह ने कहा कि मुझे लगता है कि या तो निर्दोष भाव से या राजनीतिक कारणों से कई भ्रांतियां कई सदस्यों के मन में है और सदन के माध्यम से कई सारी भ्रांतियां पूरे देश में फैलाने की कोशिश की जा रही है
- मुस्लिम पक्ष की कुछ आपत्तियों पर शाह ने बोला कि वक्फ अधिनियम और बोर्ड 1995 में लागू हुआ था। गैर-मुस्लिमों को शामिल करने के बारे में सभी तर्क वक्फ में हस्तक्षेप के बारे में हैं। सबसे पहले, कोई भी गैर-मुस्लिम वक्फ में नहीं आएगा। इसे अच्छी तरह से समझ लें।
- अमित शाह ने विपक्ष पर चुटकी लेते हुए बोला कि इनको ना कभी पिछड़ों की फिक्र रही है और ना ही कभी मुसलमानों की. ये सालों से जातिवाद और तुष्टिकरण के आधार पर राजनीति करते आए हैं, परिवार की पॉलिटिक्स को इन्होंने आगे बढ़ाया है। 2014 के बाद इन सियासत को समाप्त करके नरेंद्र मोदी ने विकास की राजनीति शुरू की।
- अमित शाह ने दावा किया कि कर्नाटक में एक मंदिर पर वक्फ ने क्लाम किया था, ईसाई समुदाय की ढेर सारी जमीनों पर भी दावा ठोका गया है।