अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर गुरुवार, 19 फरवरी को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता के कारण बाजार में जबरदस्त बिकवाली हुई और कारोबारी सत्र के अंत में प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों ही लाल निशान में नजर आए।
कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 1,236 अंकों की गिरावट के साथ 82,498.14 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 365 अंक टूटकर 25,500 के स्तर पर आ गया। बाजार में दबाव का माहौल रहने से दिग्गज शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।
सेंसेक्स की कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इंटरग्लोब एविएशन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा, आईटीसी लिमिटेड और पावर ग्रिड जैसे स्टॉक्स प्रमुख रूप से नुकसान में रहे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है, जिसके चलते बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की कीमतें साल के उच्चतम स्तर के करीब पहुंचने से महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने बाजार की अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।
एशियाई बाजारों की बात करें तो दक्षिण कोरिया का कॉस्पी करीब तीन प्रतिशत और जापान का निक्केई लगभग एक प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। वहीं, हांगकांग और चीन के शेयर बाजार पारंपरिक चंद्र नववर्ष के चलते बंद रहे। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,154.34 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक भी 440.34 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे।
बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर करीब 7.30 लाख करोड़ रुपये कम हो गया।
मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयर भी दबाव में नजर आए। बीएसई मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स में आधे प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। सत्र के दौरान बाजार की कुल वैल्यू में तेज कमी आई, जिससे निवेशकों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
निफ्टी 50 के अधिकतर शेयर गिरावट के साथ ट्रेड करते दिखे। क्वालिटी वॉल्स, ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा और अदाणी एंटरप्राइज जैसे शेयर सत्र के बड़े लूजर्स में शामिल रहे। सेंसेक्स पैक में भी ट्रेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर 1 से 2 प्रतिशत तक टूटे। हालांकि, इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ मामूली बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।
बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह लगभग सभी सेक्टरों में कमजोरी रही। ज्यादातर सेक्टरल इंडेक्स नुकसान में कारोबार करते दिखे। निफ्टी ऑटो, एफएमसीजी, मीडिया और रियल्टी इंडेक्स में एक प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद हाल के दिनों में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में सुधार के संकेत दिखे थे, लेकिन ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों की चिंता अब भी बनी हुई है।
जनसत्ता के सहयोगी फाइनेंशियल एक्सप्रेस से बातचीत में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार ने कहा कि Q3 नतीजों से मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट में अर्निंग्स रिकवरी के संकेत मिले हैं, जिससे इन शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा बढ़ी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लार्ज-कैप के मुकाबले मिड और स्मॉल-कैप शेयर अब भी ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में यह बाजार ‘स्टॉक पिकर्स मार्केट’ बन चुका है और आगे फाइनेंशियल्स, ऑटो, कैपिटल गुड्स, फार्मा और होटल सेक्टर में बेहतर संभावनाएं नजर आ रही हैं।
