डॉ. अतुल कृष्ण – “सनातन संस्कृति केवल आस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का वैचारिक आधार है”
संवाददाता – देहरादून।
रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय में आयोजित ‘सुभारती महोत्सव–2026’ के अंतर्गत सांस्कृतिक, साहित्यिक, खेल एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों की ऐसी भव्य श्रृंखला देखने को मिली, जिसने विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय चरित्र, सांस्कृतिक प्रतिबद्धता और समग्र शिक्षा दर्शन को सजीव रूप में प्रस्तुत कर दिया। 16 से 21 फरवरी तक चल रहे इस सप्ताह भर के आयोजन में जहां एक ओर खेल प्रतियोगिताओं, वाद-विवाद, मॉक पार्लियामेंट, कवि सम्मेलन, दीवार चित्रांकन, मेहंदी कला, फैशन शो और गाला ईवनिंग जैसे कार्यक्रमों ने युवा ऊर्जा को मंच दिया, वहीं सनातन भजन समागम और सूफी नाईट ने आध्यात्मिक चेतना का दिव्य वातावरण निर्मित किया।

सुभारती समूह के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण के प्रेरक मार्गदर्शन एवं कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव ने शिक्षा के साथ संस्कृति और राष्ट्रभाव के समन्वय की परंपरा को सुदृढ़ किया। आयोजन की संपूर्ण व्यवस्थाओं में डीन छात्र कल्याण डॉ. नीतिका कौशल ने कार्यवाहक सचिव के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए सभी कार्यक्रमों का सफल संचालन सुनिश्चित किया।
महोत्सव के अंतर्गत आयोजित ‘सनातन भजन समागम’ ने पूरे परिसर को भक्तिमय वातावरण से भर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ऋतु खंडूरी भूषण उपस्थित रहीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में सहदेव सिंह पुण्डीर ने सहभागिता की।
इस अवसर पर सुभारती समूह के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण ने अपने बौद्धिक संदेश में कहा कि “सनातन संस्कृति केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का वैचारिक आधार है। हमें शिक्षा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए आधुनिकता के साथ आगे बढ़ाना होगा। जब युवा अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति सजग होगा, तभी भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में सशक्त कदम बढ़ाएगा।”
मुख्य अतिथि ऋतु खंडूरी भूषण ने अपने संबोधन में कहा कि “आज की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध कर रही हैं। हमें उन्हें मुख्य धारा में और अधिक अवसर देने होंगे। साथ ही समाज में लड़कों की भी जिम्मेदारी है कि वे सम्मान, सहयोग और संवेदनशीलता का व्यवहार अपनाते हुए एक संतुलित एवं सुरक्षित वातावरण का निर्माण करें। तभी सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र की परिकल्पना साकार होगी।”

विशिष्ट अतिथि सहदेव सिंह पुण्डीर ने कहा कि “सनातन परंपरा हमें एकता, अनुशासन और सामाजिक समरसता का संदेश देती है। ऐसे समागम समाज को जोड़ने और युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित करने का सशक्त माध्यम बनते हैं।”
सनातन संगम न्यास के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण, कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन, विशेष कार्याधिकारी श्री बलवंत वोहरा, निदेशक डा जीवन आशा,न्यासी सदस्य श्री अमित जैन, श्री पुरुषोत्तम भट्ट, डॉ. लोकेश त्यागी, संस्कृति विभाग के डा राजेश तिवारी, डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। वक्ताओं ने सनातन धर्म के आदर्शों, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों पर प्रकाश डाला। भजन, स्तुति एवं आध्यात्मिक प्रस्तुतियों ने समागम को दिव्यता से परिपूर्ण कर दिया।
महोत्सव की सबसे आकर्षक कड़ी रही ‘सूफी म्यूजिकल नाइट’, जिसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार सनावर अली खान तथा मोहम्मद शारुख निदेशक, तानसेन म्यूजिक अकादमी, देहरादून ने अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सूफियाना कलाम और रूहानी नग्मों से सजी इस शाम में प्रेम, एकता और आध्यात्मिक सौहार्द का संदेश गुंजायमान हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार, प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थियों की भारी उपस्थिति रही।
फाइन आर्ट्स एवं फैशन डिजाइन विभाग द्वारा आयोजित फैशन शो में विद्यार्थियों ने भारतीय परंपरा और आधुनिकता के समन्वय को परिधानों के माध्यम से प्रस्तुत किया। कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन एवं प्रो-कुलपति डॉ. देश दीपक के संरक्षण में आयोजित इस शो ने रचनात्मकता और पेशेवर कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। दर्शकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुति और सौंदर्यबोध की सराहना की।

कार्यक्रमों में सीईओ डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा, रजिस्ट्रार श्री खालिद हसन, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह, एपीडी डॉ. लोकेश त्यागी, डीन अकादमिक श्री मनमोहन गुप्ता सहित सभी डीन, विभागाध्यक्ष, प्राचार्य एवं प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।
सुभारती महोत्सव–2026 ने यह सिद्ध किया कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक समन्वय का जीवंत मंच भी है। सूफी संगीत की सरस धारा और सनातन भजन की दिव्य गूंज के साथ सुभारती ने पुनः अपने राष्ट्रीय चरित्र और सांस्कृतिक नेतृत्व की प्रभावी छाप छोड़ी।
