ललित कला अकादमी क्षेत्रीय केंद्र गढ़ी नई दिल्ली एवं भारतीय जनजातीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान की साझेदारी में भव्य आयोजन, सुभारती विद्यार्थियों ने जीते सभी शीर्ष पुरस्कार

विजडम इंडिया।
देहरादून, 27 सितंबर 2025।
सेवा पर्व के अवसर पर आज देहरादून में रंग, कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। ललित कला अकादमी क्षेत्रीय केंद्र, गढ़ी नई दिल्ली के तत्वावधान और भारतीय जनजातीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, संस्कृति स्कूल, देहरादून के सहयोग से आयोजित एक दिवसीय पेंटिंग वर्कशॉप में प्रोफेशनल कलाकारों, कॉलेज और स्कूल के विद्यार्थियों सहित लगभग 300 प्रतिभागियों ने अपनी कल्पनाशीलता और रंगों के माध्यम से “विकसित भारत” की उज्ज्वल झलकियाँ प्रस्तुत कीं।
इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री भारत सरकार एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन, कुलपति, रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय तथा ज्यूरी सदस्य के रूप में श्री मनोज कुमार सिंह, कर्नाल भरत भंडारी, श्री राहुल कुमार और श्री संतोष साहनी की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।


सुभारती विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की ऐतिहासिक जीत
इस प्रतियोगिता में रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून के फाइन आर्ट्स विभाग के विद्यार्थियों ने शानदार सफलता प्राप्त कर प्रथम, द्वितीय और तृतीय तीनों पुरस्कार अपने नाम किए जिसमे प्रथम पुरस्कार (₹25,000/-) : अखिलेश गौड़, द्वितीय पुरस्कार (₹15,000/-) : शुभम सुंगड़ियाल, तृतीय पुरस्कार (₹10,000/-) : वंशिका बडोला
इस गौरवशाली उपलब्धि का श्रेय ललित कला विभागाध्यक्ष श्री संतोष कुमार को दिया गया, जिनके मार्गदर्शन ने विद्यार्थियों को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया।
मुख्य अतिथि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा—

“कला केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हमारी युवा पीढ़ी अपनी सृजनात्मकता और संस्कारों के साथ समाज और संस्कृति की धारा को समृद्ध करेगी। उत्तराखंड जैसी देवभूमि, जहां संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम है, वहां से यह संदेश पूरे भारत में फैलना चाहिए कि कला और संस्कृति ही हमारी असली धरोहर हैं।
आज मैं विशेष रूप से रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को बधाई देता हूँ जिन्होंने इस प्रतियोगिता में शीर्ष तीनों स्थान प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया है कि सुभारती केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि सृजनशीलता और राष्ट्र निर्माण का भी ध्वजवाहक संस्थान है।”
वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रो. डॉ. हिमांशु ऐरन, कुलपति, रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय ने कहा—
“सुभारती विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का संस्थान नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जागरण का भी केंद्र है। जब हमारे विद्यार्थी ‘विकसित भारत’ की तस्वीर अपने रंगों में उकेरते हैं, तो यह केवल चित्रकला नहीं बल्कि आने वाले राष्ट्र की दृष्टि का निर्माण है।


हमारा संकल्प है कि सुभारती के मंच से निकली हर प्रतिभा भारत के सांस्कृतिक और रचनात्मक उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह जीत हमारे विद्यार्थियों की मेहनत और विश्वविद्यालय की दृष्टि का प्रतिफल है।”
यह कार्यक्रम इस तथ्य का जीवंत प्रमाण बना कि कला और संस्कृति राष्ट्र निर्माण के मूल आधार हैं। ‘विकसित भारत के रंग, कला के संग’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उस आत्मा का उत्सव था जिसमें शिक्षा, कला, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत मेल देखने को मिला।
यह आयोजन न केवल कलाकारों की प्रतिभा का मंच बना, बल्कि यह संदेश भी दिया कि—
“कला ही विकसित भारत का जीवंत स्वरूप है और युवा ही उसकी प्रेरणा शक्ति।”

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