दिल्ली के निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने से जुड़े कानून को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट किया है कि प्राइवेट स्कूलों की फीस रेगुलेशन से जुड़ा नया कानून मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में लागू नहीं किया जाएगा। सरकार के अनुसार, यह कानून अब सीधे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होगा।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वर्तमान अकादमिक सत्र 2025-26 के बीच इस कानून को लागू करना व्यावहारिक नहीं है। सरकार ने यह भी बताया कि कानून को लागू करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और संस्थागत तैयारियों में समय लगेगा, इसलिए इसे अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करना ही उचित होगा।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को सुझाव दिया था कि निजी स्कूलों की फीस तय करने से संबंधित कानून को अप्रैल 2026 तक टालने पर विचार किया जाए। कोर्ट का मानना था कि जब शैक्षणिक सत्र पहले से चल रहा हो, उस दौरान इस तरह के बड़े नियामक बदलाव लागू करना न तो छात्रों के हित में है और न ही स्कूलों के लिए व्यवहारिक।

गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार को एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया था ताकि वह यह तय कर सके कि 2025-26 के लिए इस कानून को लागू किया जाए या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में फीस रेगुलेशन कानून लागू करना कई व्यावहारिक दिक्कतें पैदा कर सकता है।

इस पूरे मामले की जड़ दिसंबर 2025 में जारी उस सर्कुलर से जुड़ी है, जिसमें दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों की फीस से जुड़े कानून की लागू तिथि को आगे बढ़ा दिया था। सरकार के इस फैसले का निजी स्कूलों और उनके संगठनों ने विरोध किया था और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं।

दरअसल, निजी स्कूल संघों ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस निर्धारण और रेगुलेशन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 को चुनौती देते हुए कहा था कि यह कानून स्कूलों की स्वायत्तता पर असर डालता है और इसे जल्दबाजी में लागू किया जा रहा है। इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट फिलहाल सुनवाई कर रहा है।

19 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा था कि चल रहे अकादमिक सत्र के बीच में फीस से संबंधित कानून लागू करना संभव नहीं दिखता। कोर्ट ने सरकार से आग्रह किया था कि वह इसे अगले सत्र से लागू करने पर गंभीरता से विचार करे।

अब दिल्ली सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए ताजा बयान के बाद यह लगभग तय हो गया है कि निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने वाला यह कानून 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से ही लागू होगा। इससे न केवल स्कूलों को तैयारी का समय मिलेगा, बल्कि अभिभावकों और छात्रों को भी नियमों को समझने और उसके अनुसार योजना बनाने का अवसर मिल सकेगा।

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