
डॉ. अतुल कृष्ण की परिकल्पना : युवाओं में राष्ट्र के प्रति सोच, समझ और जिम्मेदारी विकसित करना
देहरादून।
रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में अनिवार्य वैल्यू-एडेड पाठ्यक्रम ‘राष्ट्र बोध’ के अंतर्गत व्याख्यान श्रृंखला का पाँचवाँ सत्र मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय स्थित सम्राट ललितादित्य प्रेक्षागृह, लाल बहादुर शास्त्री लोकप्रिय अस्पताल एवं लेक्चर थियेटर में संपन्न हुआ। यह श्रृंखला 23 दिसंबर 2025 से प्रारंभ हुए परिचयात्मक एवं उद्घाटन सत्र की निरंतर कड़ी है।

कार्यक्रम की शुरुआत मंच संचालिका मिदत असलम और सचिन श्रीनारायण ने की। उन्होंने आज के समय में राष्ट्र बोध की जरूरत पर बात रखते हुए कहा कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को सोचने-समझने वाला जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. हिमांशु ऐरन एवं संस्कृति विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश तिवारी ने विशेष आमंत्रित वक्ताओं — डॉ. सुमेधा तिवारी प्रख्यात साइकियाट्रिस्ट और डॉ. सत्यांशु प्रख्यात फिल्म निर्देशक, बॉलीवुड — को स्मृति चिह्न एवं पौधा भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर कुलपति डॉ. हिमांशु ऐरन का ये संदेश प्रासंगिक रहा कि , “आज की शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी तक सीमित नहीं होना चाहिए। ‘राष्ट्र बोध’ जैसे कार्यक्रम छात्रों को सही सोच, सही दिशा और समाज के प्रति जिम्मेदारी सिखाते हैं। ऐसे प्रयास ही एक मजबूत और जागरूक राष्ट्र की नींव रखते हैं।”
मुख्य सत्र में डॉ. सुमेधा तिवारी ने स्ट्रेस मैनेजमेंट विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में मानसिक दबाव स्वाभाविक है, लेकिन सही समय पर उसे पहचानना और संतुलित जीवनशैली अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को नियमित दिनचर्या, सकारात्मक सोच, समय प्रबंधन और आत्मसंवाद को तनाव से निपटने के प्रभावी उपाय बताते हुए कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ युवा ही मजबूत समाज और राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
वहीं डॉ. सत्यांशु ने सफलता विषय पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सफलता किसी एक रात में नहीं मिलती, बल्कि यह निरंतर मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास का परिणाम होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेने की सलाह दी और कहा कि अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदारी और स्पष्ट सोच ही आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती है।

इसी क्रम में डॉ. अतुल कृष्ण द्वारा तैयार राष्ट्र बोध कार्यक्रम की मूल भावना को विद्यार्थियों के सामने रखा गया। बताया गया कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में देश के प्रति जिम्मेदारी, सामाजिक समझ, सांस्कृतिक जुड़ाव और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना है, ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ एक जागरूक और संवेदनशील नागरिक के रूप में भी विकसित हो सकें।
दूसरे चरण में विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. संदीप ध्यानी, डॉ. अंजलि पांडेय एवं डॉ. कविता नैनवाल ने राष्ट्र बोध पाठ्यक्रम के विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए और रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से विषय को सरल ढंग से समझाया।

व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने खुलकर सवाल पूछे और अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने इस तरह के कार्यक्रमों को प्रेरणादायक और आंखें खोलने वाला बताते हुए कहा कि इससे उन्हें तनाव से निपटने और सफलता को सही दृष्टिकोण से देखने की सीख मिली।
कार्यक्रम का समापन संस्कृति विभाग के सदस्य असिस्टेंट प्रोफेसर रमन कृष्ण किमोठी द्वारा सुभारती परंपरा के अनुसार ‘आज़ाद हिंद गान’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ।

इस मौके पर संस्कृत विभाग के सचिव श्री विनय सेमवाल, डीन एकेडमिक्स मनमोहन गुप्ता, एनएसएस ऑफिसर प्रदीप महारा, असिस्टेंट प्रोफेसर मिदत असलम सहित विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्ष, संस्थान प्रमुख, शिक्षक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, राष्ट्र बोध जैसी व्याख्यान श्रृंखलाएँ छात्रों को किताबों से आगे ले जाकर तनाव प्रबंधन, सफलता की समझ और जिम्मेदार नागरिकता की दिशा में प्रेरित करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
