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ब्रेकिंग द मिथ – होम इंश्योरेंस क्यों ज़रूरी है
लेखक: गुरदीप सिंह बत्रा, हेड – प्रॉपर्टी UW, रिस्क इंजीनियरिंग, ग्लोबल अकाउंट्स व को-इंश्योरेंस, बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड (पूर्व नाम बजाज आलियांज़ जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड)
भारत में कई लोगों के लिए अपना घर खरीदना एक बहुत बड़ा सपना होता है. यह सिर्फ ईंटों और सीमेंट से बनी कोई इमारत नहीं, बल्कि यादों, सुकून और सुरक्षा से भरपूर एक जगह होती है. फिर भी, जहां लोग घर खरीदने या बनाने के लिए सालों साल पैसा जोड़ते हैं, वहीं उसे बीमा से सुरक्षित करने का खयाल बहुत कम लोग को आता है. भारत में होम इंश्योरेंस अभी भी बहुत ज़्यादा प्रचलित नहीं है, और कई घर के मालिक मानते हैं कि इसकी ज़रूरत नहीं है, यह बहुत महंगा है या फिर इसकी शर्तों को समझना बहुत मुश्किल है. सच्चाई तो यह है कि होम इंश्योरेंस आपके घर और उसमें रखे सामान को आग, चोरी, बाढ़, भूकंप और ऐसी कई अनचाही घटनाओं से बचाने का एक आसान और असरदार तरीका है
होम इंश्योरेंस महत्वपूर्ण क्यों है
भारत में ऐसे कई जोखिम हैं जो घरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. केरल में बाढ़, ओडिशा में चक्रवात और भूकंप इसके कुछ उदाहरण हैं. ऐसे हालात में घर की मरम्मत या दोबारा निर्माण पर लाखों रुपये का खर्च आ सकता है. इंश्योरेंस न होने पर घर के मालिकों को अक्सर अपनी बचत का सहारा लेना पड़ता है या फिर कर्ज़ लेना पड़ता है, जिससे लंबे समय तक आर्थिक दबाव बना रहता है. होम इंश्योरेंस ऐसे समय में एक सुरक्षा कवच का काम करता है. यह सुनिश्चित करता है कि किसी अनहोनी की स्थिति में मरम्मत या निर्माण का पूरा बोझ अकेले घर के मालिक पर न पड़े. इसके अलावा, होम इंश्योरेंस घर के अंदर मौजूद सामान, जैसे फर्नीचर, घरेलू उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स आदि को भी कवर करता है, जिन्हें दोबारा खरीदना अक्सर काफी महंगा पड़ सकता है.
होम इंश्योरेंस के बारे में आम गलतफहमियां
यह बहुत महंगा है: लोगों के होम इंश्योरेंस से दूर रहने की सबसे बड़ी वजह यह धारणा है कि इसका प्रीमियम उनकी पहुंच से बाहर होता है. जबकि सच्चाई यह है कि होम इंश्योरेंस पॉलिसीज़ काफी किफायती हो सकती हैं, खासकर जब आप इसकी तुलना किसी आपदा में होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान से करते हैं. बीमा कंपनियां ऐसे प्लान भी देती हैं जिनमें घर के मालिक अपने बजट के अनुसार कवरेज राशि और ज़रूरी ऐड-ऑन्स चुन सकते हैं. इसका मतलब यह है कि आपको उन कवर के लिए पैसे नहीं देने पड़ते जिनकी आपको ज़रूरत नहीं है. ज़्यादा खर्च होने की यह सोच अक्सर सही जानकारी की कमी से पैदा होती है, न कि असली कीमत की वजह से.
यह अपने-आप सब कुछ कवर कर लेता है: एक और आम गलतफहमी यह है कि होम इंश्योरेंस पॉलिसी लेते ही हर तरह के नुकसान का कवर मिल जाता है. यह सत्य नहीं है. हर पॉलिसी में कुछ चीज़ें शामिल होती हैं और कुछ नहीं. भूकंप या आतंकी गतिविधियों जैसे खास जोखिमों से सुरक्षा पाने के लिए अक्सर अलग से राइडर या वैकल्पिक कवर जोड़ने पड़ते हैं. ये ऐड-ऑन्स पॉलिसी को ज़्यादा व्यापक बनाते हैं. यह समझना बहुत ज़रूरी है कि पॉलिसी में क्या शामिल नहीं है, क्योंकि कई बार विवाद इसी वजह से होते हैं कि लोग ऐसे कवर की उम्मीद कर लेते हैं जो पॉलिसी में शामिल होते ही नहीं.
क्लेम कभी सेटल नहीं होते: बीमा कंपनियों पर भरोसे की कमी भी एक बड़ी वजह है. कई लोगों को लगता है कि इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम खारिज करने के लिए बहाने ढूंढती रहती हैं. सच यह है कि कभी-कभी देरी या विवाद ज़रूर होते हैं, लेकिन अगर सही डॉक्यूमेंट्स दिए जाएं और नुकसान पॉलिसी की शर्तों के तहत आता हो, तो ज़्यादातर क्लेम सेटल हो जाते हैं. आमतौर पर दिक्कत तब आती है जब घर के मालिक पॉलिसी को ध्यान से नहीं पढ़ते, ज़रूरी जानकारी साझा नहीं करते, क्लेम के समय ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स नहीं देते, या फिर प्रोडक्ट को ठीक से समझे बिना पॉलिसी खरीद लेते हैं. क्लेम प्रक्रिया की सही जानकारी – जैसे बिल संभालकर रखना, नुकसान की फोटो लेना और समय पर सूचना देना – क्लेम को आसानी और बिना झंझट के सेटल होने की संभावना को काफी बढ़ा देती है.
मुझे इसकी ज़रूरत नहीं है, आपदाएं बहुत कम होती हैं: कुछ लोगों का मानना है कि आपदाएं कभी-कभी ही होती हैं, इसलिए इंश्योरेंस की कोई खास ज़रूरत नहीं है. लेकिन भारत में बाढ़, चक्रवात, भूकंप और आग जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है. इसके अलावा चोरी या सेंधमारी से भी बड़ा नुकसान हो सकता है. भले ही आपदाएं रोज़ न हों, लेकिन जब होती हैं तो उनका असर बहुत भारी होता है और आर्थिक रूप से झकझोर देने वाला हो सकता है. इंश्योरेंस आपदाओं की भविष्यवाणी करने के बारे में नहीं है, बल्कि अनहोनी के लिए पहले से तैयार रहने के बारे में है.
यह सिर्फ घर के मालिकों के लिए है, किरायेदारों के लिए नहीं: एक आम गलतफहमी यह है कि होम इंश्योरेंस सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए होता है जिनके पास अपना घर है. जबकि सच्चाई यह है कि किरायेदारों को भी इससे फायदा मिल सकता है, क्योंकि इंश्योरेंस सिर्फ इमारत की सुरक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि घर के अंदर रखे सामान को भी कवर करती है. किरायेदार अक्सर फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण और निजी कीमती सामान पर अच्छी-खासी रकम खर्च करते हैं, जो चोरी, आग या पानी से होने वाले नुकसान जैसे जोखिमों के सामने असुरक्षित होते हैं. भले ही घर की संरचना मकान-मालिक की हो, लेकिन किरायेदार अपने सामान की सुरक्षा के लिए अलग से पॉलिसी ले सकते हैं.
भारत में होम इंश्योरेंस सिर्फ संपत्ति की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति से भी जुड़ा हुआ है. कीमत, कवरेज और क्लेम से जुड़ी गलत धारणाओं के कारण कई लोग इससे दूर रहते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि होम इंश्योरेंस किफायती और बेहद ज़रूरी है. चाहे आप घर के मालिक हों या किरायेदार, प्राकृतिक आपदाओं, चोरी या दुर्घटनाओं से अपने घर और सामान की सुरक्षा करना एक स्मार्ट और ज़िम्मेदार विकल्प है. होम इंश्योरेंस को नज़रअंदाज़ करने से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि इसे अपनाने से आपकी सबसे कीमती संपत्ति – आपका घर – सुरक्षित रहता है
