अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर कड़े नियम होते हैं, लेकिन कभी-कभी छोटी सी लापरवाही बड़ा विवाद बन जाती है। ऐसा ही एक मामला बेंगलुरु के एक यात्री के साथ सामने आया, जहां फ्लाइट के अंदर हुई चूक के चलते एयरलाइन को उपभोक्ता अदालत से फटकार और जुर्माना दोनों झेलना पड़ा।
यह घटना 5 मार्च 2024 की है, जब इंडिगो की एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट बैंकॉक से बेंगलुरु की ओर रवाना हुई थी। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद केबिन के अंदर एक अप्रत्याशित हादसा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, फ्लाइट अटेंडेंट ने ओवरहेड लगेज बिन खोला, तभी उसमें रखा गर्म नॉन-वेज करी का पैकेट नीचे गिर गया। दुर्भाग्य से यह पैकेट सीधे एक यात्री पर आकर गिरा, जिससे उसके कपड़े बुरी तरह गंदे हो गए।
गर्म खाने के गिरने से यात्री को न सिर्फ शारीरिक जलन और असहजता झेलनी पड़ी, बल्कि सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी का भी सामना करना पड़ा। यात्री का कहना था कि वह शाकाहारी है और नॉन-वेज खाने की बदबू और दाग-धब्बों के कारण उसे मानसिक तनाव हुआ। उसने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना में उसके कपड़ों के साथ-साथ बैग और इलेक्ट्रॉनिक सामान को भी नुकसान पहुंचा।
घटना के बाद एयरलाइन ने अपनी गलती स्वीकार की और मामले को वहीं सुलझाने के लिए यात्री को 5,000 रुपये का ट्रैवल वाउचर देने की पेशकश की। हालांकि यात्री इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुआ। उसका कहना था कि जो परेशानी और नुकसान उसे हुआ है, उसकी भरपाई केवल वाउचर से संभव नहीं है। इसके बाद उसने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया और 5 लाख रुपये मुआवजे की मांग की।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। यात्री ने कहा कि ओवरहेड बिन में गर्म भोजन रखना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है। वहीं एयरलाइन ने इसे एक अनजाने में हुई चूक बताया। लेकिन अदालत ने इस तर्क को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया।
उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में साफ कहा कि ओवरहेड स्टोरेज बिन में इस तरह से गर्म खाने का पैकेट रखना गंभीर लापरवाही है और इससे यात्रियों को चोट या नुकसान हो सकता है। आयोग ने माना कि एयरलाइन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है।
अदालत ने इंडिगो को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए यात्री को 20,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके साथ ही 5,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में अलग से देने को कहा गया। इस तरह कुल 25,000 रुपये की राशि एयरलाइन को चुकानी पड़ी।
यह मामला एयरलाइंस के लिए एक अहम संदेश है कि यात्रियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी छोटी लापरवाहियां भी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती हैं। साथ ही यह यात्रियों को भी यह भरोसा देता है कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कानून मौजूद है।
