भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। हाल ही में रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर उठे सवालों के बावजूद दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ रही है और जल्द ही इस दिशा में अहम प्रगति देखने को मिल सकती है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताएं सही दिशा में हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में इस मोर्चे पर उत्साहजनक खबर सामने आएगी। गोयल के अनुसार, दोनों देश अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते को अंतिम रूप देने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हर मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अपनी अलग शर्तों, प्राथमिकताओं और संभावनाओं पर आधारित होता है। भारत और अमेरिका के बीच बातचीत का स्तर काफी अच्छा है और दोनों पक्ष एक-दूसरे की चिंताओं को समझते हुए आगे बढ़ रहे हैं। गोयल ने यह भी बताया कि उनके और अमेरिका में उनके समकक्ष के बीच न सिर्फ मजबूत पेशेवर संबंध हैं, बल्कि आपसी समझ और विश्वास भी है, जो इस प्रक्रिया को आसान बनाता है।

जब उनसे भारत-ईयू व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहे जाने के बाद भारत-अमेरिका समझौते को लेकर समयसीमा पूछी गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे समझौतों के लिए कोई तय तारीख नहीं होती। व्यापार करार तभी अंतिम रूप लेते हैं जब दोनों देशों को लगे कि सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर संतुलन बन गया है और समझौता दोनों के लिए लाभकारी है।

इस बीच, अगले सप्ताह विदेश मंत्री एस जयशंकर की अमेरिका यात्रा प्रस्तावित है। यात्रा से पहले उन्होंने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ अहम बैठक की, जिसमें व्यापार, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य रणनीतिक विषयों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि जयशंकर अपनी यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी मुलाकात करेंगे, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

रूसी तेल की खरीद को लेकर जब भारत-अमेरिका संबंधों में संभावित तनाव पर सवाल किया गया, तो पीयूष गोयल ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी भी तरह से दोनों देशों के रिश्तों में बाधा नहीं है। कुछ समय के लिए गलतफहमियां जरूर उत्पन्न हुई थीं, लेकिन अब उन्हें काफी हद तक दूर कर लिया गया है।

सरकार का मानना है कि भारत की ऊर्जा जरूरतें और वैश्विक परिस्थितियां अलग-अलग हैं, और अमेरिका भी इस वास्तविकता को समझता है। ऐसे में आने वाले समय में भारत-अमेरिका साझेदारी और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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