समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने गुरुवार को पूर्व विधायक पवन पांडे के आवास पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में भाग लिया। इस दौरान सपा प्रमुख ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने को चुनौती दी और राम मंदिर में चढ़ावे चोरी का मुद्दा उठाया।

हालांकि, श्रीमद् भागवत कथा आयोजन स्थल से लगभग 30 किलोमीटर दूर होने के बावजूद सपा चीफ अखिलेश यादव राम मंदिर नहीं गए। इसको लेकर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने सपा प्रमुख की इस यात्रा को लेकर निशाना साधा है। बृजेश पाठक ने कहा, “समाजवादी पार्टी के हाथ कार सेवकों के खून से सने हैं।”

राम मंदिर दर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी को सनातन संस्कृति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा केवल तुष्टीकरण और वोट की राजनीति करती है, इसी वजह से राम मंदिर जाने से बचती है।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेताओं के हाथ कारसेवकों के खून से रंगे हुए हैं। ऐसे में वे राम मंदिर कैसे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सपा अल्पसंख्यकों को नाराज नहीं करना चाहती, इस डर से अखिलेश राम मंदिर नहीं जा रहे हैं। उनके मुताबिक, सपा के लिए यह पूरा मामला वोट पॉलिटिक्स से जुड़ा हुआ है।

SIT को लेकर विपक्ष के हंगामे पर भी डिप्टी सीएम ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष जब चुनाव जीतता है तो चुनाव आयोग अच्छा होता है, लेकिन जब हारता है तो अपनी खीज निर्वाचन आयोग पर निकालता है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि केरल, तमिलनाडु और हिमाचल में विपक्ष चुनाव जीता, लेकिन जीत के बाद उसने निर्वाचन आयोग को लेकर कोई सवाल नहीं उठाया।

ब्रजेश पाठक ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को पता है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष की लुटिया पूरी तरह डूबने वाली है। इसी वजह से विपक्ष फेस सेविंग के लिए इस तरह के षड्यंत्र रच रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी आने वाली स्थिति को लेकर परेशान है और इसी के चलते चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। अखिलेश यादव बृहस्पतिवार को अयोध्या में भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मंच से कहा कि सुदर्शन चक्र सज्जनों की रक्षा के लिए है उन्हें डराने के लिए नहीं है। अखिलेश यादव ने कहा कि जो बड़े-बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री अगर इतना ही आश्वस्त हैं, तो खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं।

अखिलेश यादव ने कहा कि अहंकार, सत्ता, भेदभाव, जाति, ऊंच-नीच, छुआछूत का वंदन आज हमारे सामने है। हमारे लिए तो जो प्रभु श्री राम हैं वही प्रभु श्री कृष्ण हैं और जो श्री कृष्ण हैं वही श्री राम हैं। कथा मन और मनोबल को बढ़ाने का काम करती है।

सपा चीफ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर हर साल माता-बहनों को 40 हजार रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी तो किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा और किसी के दुकान और मकान को उजाड़ा भी नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जब समाजवादी सरकार बनेगी तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसे अयोध्या की पहचान हो उसके लिए विकास को हम गति देने का काम करेंगे।

बता दें, उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसके लिए चुनावी मैदान पूरी तरह सज चुका है। उत्तर प्रदेश के चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन और सपा-कांग्रेस वाले इंडिया गठबंधन के बीच है। अयोध्या की सीट से समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपने पहले उम्मीदवार के तौर पर पवन पांडेय के नाम का ऐलान किया था।बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की 20वीं पुण्यतिथि पर बसपा ने लखनऊ में बड़े स्तर पर कार्यक्रम की तैयारी की। यूपी के सभी जिलों से बसपा नेता और कार्यकर्ता उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंच रहे हैं।

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