गुरुग्राम में हत्या के शिकार युवक का अज्ञात शव बताकर किया अंतिम संस्कार, SHO निलंबित
31 वर्षीय रियल एस्टेट पेशेवर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में कथित लापरवाही के आरोप में गुरुग्राम के बादशाहपुर थाने के SHO राजेश बागड़ी को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि पुलिस ने युवराज के शव को अज्ञात मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया और उसकी जानकारी ZIPNET डेटाबेस पर अपलोड नहीं की।
गुरुग्राम के बादशाहपुर थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) राजेश बागड़ी को 31 वर्षीय रियल एस्टेट पेशेवर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में कथित लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।
राजेश बागड़ी और अन्य पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने युवराज के शव को अज्ञात मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि शव से संबंधित जानकारी पुलिस डेटाबेस ZIPNET पर अपलोड नहीं की गई थी।
यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इसके बाद पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। गुरुग्राम पुलिस ने गुरुवार को पुष्टि की कि कथित चूक के मामले में SHO राजेश बागड़ी को निलंबित कर दिया गया है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शव की जानकारी अंतरराज्यीय पुलिस डेटाबेस में दर्ज की जाती, तो संभवतः युवराज के परिवार को उनकी पहचान करने का अवसर मिल सकता था।
क्या है पूरा मामला?
समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, युवराज मनचंदा का शव 10 सितंबर 2026 को गुरुग्राम के बादशाहपुर इलाके में एक नाले से बरामद किया गया था।
हालांकि, शव से संबंधित जानकारी जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क (ZIPNET) पर अपलोड नहीं की गई। यह एक अंतरराज्यीय पुलिस डेटाबेस है, जिसका इस्तेमाल अज्ञात शवों और लापता व्यक्तियों से संबंधित जानकारी साझा करने के लिए किया जाता है।
परिवार को युवराज की पहचान करने का अवसर मिलने से पहले ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
निर्धारित प्रक्रिया का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने के कारण संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस आयुक्तों से मांगे हलफनामे
युवराज की बहन हरसिमरन मनचंदा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके भाई का शव बरामद करने के बावजूद उसका विवरण अंतरराज्यीय डेटाबेस में दर्ज नहीं किया।
मामले पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और गुरुग्राम के पुलिस आयुक्तों से व्यक्तिगत हलफनामे मांगे।
अधिकारियों के अनुसार, इसके बाद गुरुग्राम पुलिस के पांच कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई। इनमें निलंबित SHO भी शामिल हैं।
कौन थे युवराज सिंह मनचंदा?
युवराज सिंह मनचंदा दिल्ली के सरिता विहार के निवासी थे। वह गुरुग्राम स्थित अडानी रियल्टी में सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत थे।
इस मामले में उनकी पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उनके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा पर युवराज की हत्या की साजिश रचने का आरोप है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अन्या वत्स और युवराज पहले एक ही कंपनी में काम करते थे। अन्या को 2022 में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद नौकरी से निकाल दिया गया था, जबकि युवराज उसी कंपनी में काम करते रहे।
दोनों के बीच वित्तीय लेन-देन को लेकर भी विवाद था।
कैसे हुई युवराज की हत्या?
आरोप है कि अन्या वत्स ने पहले युवराज को परेशान किया और फिर संयम सचदेवा के साथ मिलकर उनकी गोली मारकर हत्या करने की साजिश रची।
आरोपियों ने कथित तौर पर युवराज का शव बादशाहपुर के पास एक नाले में फेंक दिया।
पुलिस ने शव को काफी खराब और सड़ी-गली अवस्था में बरामद किया था। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, अज्ञात शव की पहचान कराने के लिए उसका विवरण ZIPNET पर अपलोड किया जाना जरूरी था।
नियमों के मुताबिक, यदि 72 घंटे तक शव की पहचान नहीं हो पाती है, तो उसका अंतिम संस्कार किया जा सकता है। लेकिन इस मामले में शव की जानकारी डेटाबेस पर अपलोड नहीं किए जाने के आरोप ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने हत्या के मामले में अन्या वत्स और संयम सचदेवा को उत्तराखंड के कैंची धाम से गिरफ्तार किया है।
