अमेरिकी ग्रीन कार्ड प्रतिबंधों के बीच TCS की बड़ी योजना, अगले 5 साल में अमेरिका में 15,000 भर्तियां
अमेरिका में PERM कार्यक्रम के तहत ग्रीन कार्ड संबंधी आवेदनों पर रोक के बावजूद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15,000 कर्मचारियों की भर्ती की योजना दोहराई है। कंपनी का कहना है कि उसकी स्थानीय भर्ती और अमेरिकी ग्राहकों को सेवाएं देने की रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
लेखिका: साक्षी अरोड़ा | अपडेट: 9 अक्टूबर 2026, सुबह 10:37 बजे IST
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अमेरिकी सरकार की हालिया आव्रजन कार्रवाई के संभावित प्रभाव को कमतर बताते हुए कहा है कि अमेरिका में स्थानीय स्तर पर भर्ती करने और ग्राहकों को सेवाएं देने की उसकी योजनाएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
कंपनी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में उसने अमेरिकी ग्रीन कार्ड कार्यक्रम के तहत केवल एकल अंक में आवेदन किए हैं। यानी आवेदनों की संख्या 10 से कम रही है। इसी वजह से कंपनी का मानना है कि मौजूदा निलंबन का उसकी कार्यबल रणनीति पर तत्काल प्रभाव सीमित रहेगा।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी प्रशासन विदेशी पेशेवरों की भर्ती के लिए तकनीकी कंपनियों द्वारा आव्रजन कार्यक्रमों के इस्तेमाल की जांच तेज कर रहा है।
TCS उन आठ कंपनियों में शामिल है, जिन पर परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) के तहत नए मामले दाखिल करने या लंबित मामलों को आगे बढ़ाने पर रोक लगाई गई है। इस कार्यक्रम के जरिए नियोक्ता पात्र विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया को प्रायोजित करते हैं।
अमेरिका में 15,000 नौकरियों की योजना बरकरार, स्थानीय भर्ती पर जोर
PERM के तहत TCS द्वारा हाल के वर्षों में दाखिल किए गए आवेदनों की संख्या कंपनी के जवाब का एक प्रमुख आधार है।
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि पिछले दो वर्षों में उसके आवेदन एकल अंक में रहे हैं। इसलिए उसे उम्मीद नहीं है कि इस निलंबन से उसकी भर्ती रणनीति या ग्राहकों के साथ कामकाज पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
TCS ने कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के किसी भी निर्देश का पालन करेगी। कंपनी ने अमेरिका में अपने 31 कार्यालयों और डिलीवरी केंद्रों का भी उल्लेख किया, जहां उसने स्थानीय कर्मचारियों की एक बड़ी टीम तैयार की है।
अगले पांच वर्षों में 15,000 कर्मचारियों को जोड़ने की योजना इसी स्थानीय कार्यबल को और बढ़ाने का हिस्सा है।
अमेरिकी सरकार द्वारा बड़ी तकनीकी और आउटसोर्सिंग कंपनियों की आव्रजन प्रक्रियाओं की जांच बढ़ाए जाने के बीच TCS ने अपनी रणनीति में अमेरिका के भीतर भर्ती को प्रमुख स्थान दिया है।
PERM पर रोक का किन कंपनियों पर असर पड़ेगा?
अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले के दायरे में TCS के अलावा इन्फोसिस, विप्रो, HCL, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं।
अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सॉन्डरलिंग ने गुरुवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच के साथ इस कार्रवाई की घोषणा की। यह कदम अमेरिकी एंटी-फ्रॉड टास्क फोर्स के तहत उठाया गया।
सॉन्डरलिंग के अनुसार, श्रम विभाग इन कंपनियों से जुड़े नए स्थायी श्रम प्रमाणन आवेदनों को स्वीकार नहीं करेगा और लंबित आवेदनों पर भी आगे की प्रक्रिया नहीं करेगा।
उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को इस कार्रवाई में शामिल किए जाने के संदर्भ में कई सक्रिय संघीय जांचों का भी उल्लेख किया।
PERM रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक चरण है। इसलिए इस निलंबन से संबंधित कंपनियों की पात्र विदेशी कर्मचारियों के लिए इस मार्ग से स्थायी श्रम प्रमाणन हासिल करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
हालांकि, यह H-1B वीजा कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगाने के समान नहीं है।
सॉन्डरलिंग ने कंपनियों द्वारा विदेशी कर्मचारियों के लिए किए गए आवेदनों की संख्या का हवाला देते हुए इस कार्रवाई का बचाव किया।
उनके अनुसार, 2009 से इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किए, 2.30 लाख से अधिक H-1B वीजा मंजूर हुए और एक लाख से ज्यादा स्थायी श्रम प्रमाणन प्राप्त किए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्यक्रमों के कारण अमेरिकी कर्मचारियों की लाखों नहीं, बल्कि सैकड़ों हजार नौकरियां प्रभावित हुई हैं। ये आंकड़े और आरोप अमेरिकी प्रशासन द्वारा कार्रवाई के समर्थन में दिए गए तर्कों का हिस्सा हैं।
नैसकॉम ने कुशल पेशेवरों की आवाजाही को अलग मुद्दा बताया
भारतीय तकनीकी उद्योग के लिए स्थायी निवास और अस्थायी कार्य वीजा के बीच अंतर महत्वपूर्ण है।
नैसकॉम ने कहा कि हालिया फैसला आव्रजन की एक विशिष्ट प्रक्रिया से संबंधित है। संगठन ने यह भी दोहराया कि आव्रजन और कुशल पेशेवरों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को एक ही मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए।
उद्योग संगठन के मुताबिक, अमेरिकी नियोक्ता ऐतिहासिक रूप से अल्पकालिक कौशल की जरूरतों को पूरा करने के लिए H-1B वीजा का इस्तेमाल करते रहे हैं।
नैसकॉम ने यह भी कहा कि भारतीय तकनीकी कंपनियों ने हाल के वर्षों में H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता कम की है और अमेरिका में स्थानीय भर्ती बढ़ाने के साथ वहां अपने कार्यबल का विस्तार किया है।
संगठन का तर्क है कि भारतीय IT कंपनियां अमेरिका की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। वे फॉर्च्यून 500 की अधिकांश कंपनियों के साथ काम करती हैं, कारोबार में नवाचार और विकास को बढ़ावा देती हैं तथा स्थानीय रोजगार पैदा करने में मदद करती हैं।
नैसकॉम ने यह भी कहा कि PERM के माध्यम से H-1B वीजा पर काम कर रहे कर्मचारियों के स्थायी निवास में बदलने के मामले अपेक्षाकृत सीमित हैं।
संगठन के मुताबिक, भारतीय तकनीकी कंपनियां 80 से अधिक देशों में काम करती हैं और स्थानीय कानूनों तथा नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नैसकॉम ने भरोसा जताया कि कंपनियां अमेरिका में भी लागू नियमों का पालन करती रहेंगी।
भारतीय IT उद्योग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है अमेरिकी फैसला?
अमेरिका भारतीय तकनीकी उद्योग का सबसे बड़ा बाजार है। इसलिए रोजगार आधारित आव्रजन नियमों में बदलाव उन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अमेरिकी ग्राहकों को सेवाएं देती हैं।
वर्क वीजा पर सख्त निगरानी और H-1B आवेदकों के लिए बढ़ती लागत ने उन कंपनियों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं, जो कुशल पेशेवरों को अलग-अलग देशों में भेजकर काम कराती हैं।
PERM पर ताजा रोक ने स्थायी निवास हासिल करने के एक रास्ते को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। हालांकि, TCS का कहना है कि उसे अपनी योजनाओं पर किसी बड़े प्रभाव की आशंका नहीं है।
कंपनी की स्थानीय भर्ती पर निर्भरता उसके इस रुख का प्रमुख आधार है। वहीं, नैसकॉम ने ग्रीन कार्ड प्रक्रिया और अमेरिकी कंपनियों की कुशल पेशेवरों की जरूरतों को अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखने पर जोर दिया है।
इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने नौ विश्वविद्यालयों में इस्तेमाल होने वाले J-1 वीजा कार्यक्रम की जांच की घोषणा भी की। इस सूची में येल, हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और कैलटेक जैसे संस्थान शामिल हैं।
यह घटनाक्रम संकेत देता है कि अमेरिकी प्रशासन की जांच केवल PERM कार्रवाई में नामित तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं है।
