31 लाख के फर्जी नोट बरामद
(मथुरा)(ए.के.शर्मा)
थाना रिफाइनरी पुलिस ने नकली नोटों के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले कथित गिरोह का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे से 32 हजार रुपये असली नकदी, करीब 31 लाख रुपये के मनोरंजन बैंक के नोट, एक स्विफ्ट कार, लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन और एक चाकू बरामद किया गया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लवकुश (22), ब्रजमोहन उर्फ इक्का उर्फ बिरजू (23) और अनिल (23) के रूप में हुई है। तीनों मथुरा, आगरा और हाथरस के रहने वाले बताए गए हैं। आरोपियों को बरेली हाईवे अंडरपास पर कोयला अलीपुर की ओर जाने वाले कट के पास से गिरफ्तार किया गया।पुलिस के मुताबिक मामले की शुरुआत 29 सितंबर को दर्ज शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से संपर्क कर उससे चार किलो चांदी और एक लाख रुपये की ठगी की गई। जांच के दौरान पुलिस को शिकायतकर्ता के बयानों में कई विरोधाभास मिले। जिस स्थान को चांदी की टंच कराने की दुकान बताया गया था, वहां जांच में नमकीन की दुकान मिली। साथ ही चार किलो चांदी लाए जाने के संबंध में सीसीटीवी फुटेज से भी कोई पुष्टि नहीं हुई।
जांच के दौरान पुलिस को शिकायतकर्ता की गाड़ी से मनोरंजन बैंक के नोट मिले। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की दिशा में जांच आगे बढ़ाई और आरोपियों तक पहुंची।
पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि ‘लाला’ नाम का एक व्यक्ति व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए ग्राहकों को उनके पास भेजता था। ग्राहकों को एक लाख रुपये के बदले पांच या सात लाख रुपये के कथित नकली नोट देने का लालच दिया जाता था। विश्वास कायम करने के लिए एक असली नोट को नकली नोटों की गड्डी में से निकालकर ग्राहक को चलाकर देखने के लिए दिया जाता था। इसके बाद मनोरंजन बैंक के नोटों को पैक करके कथित नकली नोट बताकर ग्राहक को सौंप दिया जाता था।
पुलिस के अनुसार ठगी से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा लाला के आदमी को दिया जाता था, जबकि बाकी रकम आरोपी आपस में बांट लेते थे। पुलिस का कहना है कि शिकायतकर्ता के साथ भी इसी तरीके से ठगी किए जाने की बात सामने आई है।
इस मामले में पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार मामले में सचिन निवासी अलीगढ़ तथा ‘लाला’ समेत एक अन्य अज्ञात व्यक्ति की तलाश की जा रही है।वही
अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध) श्रीमती श्वेता यादव ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया कि यह गिरोह व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लोगों को जाल में फंसाकर ठगी करता था। आरोपियों द्वारा बताया गया कि एक व्यक्ति “लाला” नामक मास्टरमाइंड के जरिए लोग उनसे जुड़ते थे और असली नोटों के बदले कई गुना नकली नोट देने का झांसा दिया जाता था।वही सीओ रिफाईनरी प्रवीण कुमार तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया की पुलिस जांच में यह भी पाया गया कि वादी द्वारा लगाए गए आरोपों में कई विरोधाभास थे और घटनास्थल/दस्तावेजी साक्ष्य भी संदिग्ध पाए गए। इसके बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य फरार सदस्यों “लाला” और एक अज्ञात साथी की तलाश में दबिश दे रही है।कार्रवाई करने वाली टीम में थाना रिफाइनरी प्रभारी निरीक्षक अजय कौशल के साथ उपनिरीक्षक विक्रान्त तोमर, पविन्द्र कुमार, रोहित उज्जवल, तेजेन्द्र सिंह तथा पुलिसकर्मी बबलू कुमार, सौरव सागर और विशाल तोमर शामिल रहे।
