लंबे समय से राजनीतिक चर्चा से दूर भाजपा से राज्यसभा का टिकट पाने वाले गोपीकृष्ण पांडेय अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। उनके राजनीतिक सफर में जितना जिक्र बजरंग दल, हिन्दू जागरण मंच जैसे संगठनों में उनके काम का हो रहा है, उससे ज्यादा गदर फिल्म का। वजह बड़ी रोचक है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 2001 में कानपुर में संघ का एक बड़ा कार्यक्रम हुआ। देश भर से प्रचारक इसमें भाग लेने के लिए आए। गोपीकृष्ण पांडेय उन दिनों आचार्य नगर में रहते थे। उस दौर में संघ के एक बड़े प्रचारक (नरेंद्र मोदी) की निकटता कार्यकर्ता गोपी पांडेय से थी। वो गोपी के घर ही ठहरे। बाल काफी बड़े हो गए थे, वहीं नाई बुलवाकर बाल कटवाए। नहाने-खाने के बाद तैयार हुए, बैठक अगले दिन थी।
शाम का वक्त खाली था तो गोपीकृष्ण पांडेय को साथ लेकर वह प्रचारक निकले। रास्ते में बातचीत हुई। उन दिनों गदर फिल्म ने गदर मचा रखी है। वह बड़े प्रचारक (नरेंद्र मोदी) गोपी पांडेय के साथ गदर देखने चले गए। उस दौर से दोनों का परिचय और प्रगाढ़ता से आगे बढ़ा। सोमवार को जब टिकट की घोषणा हुई, सूची में गोपीकृष्ण पांडेय का नाम आ गया तो गदर फिर चर्चा में आ गई है। वह प्रचारक (नरेंद्र मोदी)आज पार्टी के शीर्ष नेताओं में से एक हैं। खुद गोपीकृष्ण पांडेय ने इसकी तस्दीक की।
राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने पर गोरीकृष्ण पांडेय ने कहा कि संघर्ष और सेवा करने वालों को भाजपा में अवसर जरूर मिलते हैं। मुझे यह अवसर मिला है तो कानपुर और यूपी की जनता के लिए हमेशा उपलब्ध रहूंगा। विकास में योगदान करूंगा। आपको बता दें इसी महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने दस में से आठ प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। भाजपा ने कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की 52 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखते हुए कानपुर के तीन नेताओं को मैदान में उतारा है। इनमें प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार ओबीसी श्रेणी से आते हैं तो गोपी कृष्ण पांडेय सवर्ण वर्ग से आते हैं।
जनगणना के अनुसार सेंट्रल यूपी में सबसे बड़ी आबादी 40 से 45 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग (संयुक्त रूप से) की है। वहीं 30 से 35 प्रतिशत आबादी सामान्य वर्ग की है। इनमें भी सबसे अधिक आबादी एकल रूप से ब्राह्मणों की है। इन जातीय समीकरणों और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए शीर्ष संगठन ने ओबीसी और ब्राह्मण प्रत्याशी पर दांव लगाया है। यह पहला मौका है जब कानपुर से भाजपा के सिंबल पर तीन प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है। कानपुर दक्षिण के बर्रा में रहने वाले 60 वर्षीय प्रकाश पाल ने अपना राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में शुरू किया। संघ से जुड़े उन्हें 36 वर्ष हो चुके हैं। उन्होंने तीन वर्ष तक पूर्णकालिक तहसील प्रचारक के रूप में काम किया।
इसके बाद संघ से सीधे भाजपा संगठन में आए। वहीं पहले आचार्यनगर और वर्तमान में बारादेवी में रहने वाले गोपी कृष्ण पांडेय 12 वर्ष की आयु में ही स्वयंसेवक के रूप में संघ से जुड़ गए थे। बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों में काम करने के बाद 1998 में वह भाजयुमो के प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए। इसी तरह झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार भी कानपुर दक्षिण से ताल्लुक रखती हैं। उनकी ससुराल बर्रा दो में है। उनकी शादी सत्यनारायण सचान के बेटे सुबोध सचान से हुई है। सुबोध नोएडा में नौकरी करते हैं। पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. वीना आर्या पटेल ने घर पहुंचकर सत्यनारायण को बधाई दी।