उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की सभी 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। समाजवादी पार्टी ने तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने का इशारा कर दिया है। भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशी अब राज्यसभा के सांसद बन जाएंगे। सपा के दोनों प्रत्याशी पहले ही नामांकन कर चुके हैं। भाजपा के आठों प्रत्याशी आज नामांकन दाखिल करेंगे। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने का इशारा मंगलवार की सुबह सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर किया। उन्होंने लिखा कि तीन नहीं हमारी निगाह 403 पर है।
यूपी विधानसभा में 403 सीटें हैं। अखिलेश यादव का यह कहना कि तीन नहीं, हमारी निगाह चार सौ तीन पर है, ऐसे में साफ हो गया है कि अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव में भाजपा से भिड़ने की जगह अब विधानसभा चुनाव में ही आर-पार करने के मूड में हैं। पिछले दो चुनावों से सत्ता से बाहर चल रही सपा के सामने आने वाला विधानसभा चुनाव करो या मरो वाला चुनाव है। 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली जीत से सपा में उत्साह भी है।
अखिलेश यादव ने पिछले दिनों इशारा किया था कि तीसरा प्रत्याशी भी सपा की तरफ से आ सकता है। अब कदम खींचने के पीछे विधानसभा चुनाव से पहले किसी तरह के झटके से दूरी बनाने की कवायद माना जा रहा है। भाजपा सात और सपा दो प्रत्याशियों को आसानी से जिताने की स्थिति में है। भाजपा को आठवां और सपा को तीसरा प्रत्याशी जिताने के लिए क्रास वोटिंग करानी होती। पिछले राज्यसभा चुनाव में सपा को झटका लग चुका है। अगर चुनाव होता तो भाजपा भी अपने आठवें प्रत्याशी को जिताने के लिए जोर लगाती। विधायकों का गणित इस तरह बन रहा था कि सपा को ज्यादा वोटों की जरूरत होती। ऐसे में माना जा रहा है कि सपा ने तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने में ही भलाई समझी है।
सपा ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव और उद्योगपति रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के निदेशक धनराज परिमल नथवानी को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया है। प्रोफेसर रामगोपाल यादव रिश्ते में अखिलेश यादव के चाचा लगते हैं। समाजवादी पार्टी के रणनीतिकार माने जाते हैं। 29 जून 1946 को सैफई (इटावा) में जन्मे रामगोपाल यादव राजनीति से पहले अध्यापन क्षेत्र से जुड़े रहे। उन्होंने भौतिक विज्ञान में M.Sc. और राजनीति विज्ञान में Ph.D. की उपाधि हासिल की है।
रामगोपाल ने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1989 में ब्लॉक प्रमुख और इटावा जिला परिषद के अध्यक्ष के रूप में की थी। वर्ष 1992 में वे पहली बार राज्यसभा के सदस्य चुने गए। इसके बाद 2004 में संभल से लोकसभा सांसद चुने गए। संसद में सपा संसदीय दल के नेता रहे। लगातार कई बार से उच्च सदन में सपा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
धनराज परिमल नाथवानी देश के प्रमुख कॉरपोरेट एक्जीक्यूटिव, खेल प्रशासक के साथ ही रिलायंस ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी हैं। 5 फरवरी 1986 को जन्मे धनराज ने लंदन के रीजेंट्स बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस में स्नातक की उपाधि हासिल की है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में ग्रुप प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं और रिलायंस न्यू एनर्जी, जियो इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग एवं कंस्ट्रक्शन (EPC) जैसे कई प्रमुख व्यवसायों और प्रोजेक्ट्स की कमान संभालते हैं।
कॉरपोरेट जगत के अलावा खेल प्रशासन में भी उनकी मजबूत पकड़ है। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष हैं, जहां उन्होंने केंद्रीय मंत्री अमित शाह के बाद यह पदभार संभाला था। इसके अलावा वह गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन (GSFA) के अध्यक्ष भी हैं। उनके पिता परिमल नाथवानी भी देश के जाने-माने उद्योगपति और राज्यसभा सांसद रहे हैं।
भाजपा ने कल ही अपने आठों प्रत्याशियों का ऐलान किया था। सभी प्रत्याशी आज पर्चा दाखिल करेंगे। भाजपा ने योगी सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा, ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल, पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत, प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया है।
राज्यसभा के लिए नामित भाजपा प्रत्याशी राधाकांत ओझा का जन्म 10 फरवरी 1959 को प्रतापगढ़ में हुआ था। 1987 से लगातार वकालत कर रहे राधाकांत ओझा इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के दो बार (2015-16 और 2022-23) अध्यक्ष रहे। शुरुआती दिनों से आरएसएस के सहयोगी संगठनों और भाजपा से जुड़े रहे हैं। संवैधानिक और सिविल मामलों के विशेषज्ञ राधाकांत ओझा के बड़े भाई शिवाकांत ओझा लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में रहे एवं सपा और भाजपा सरकारों में मंत्री रहे।
