यूपी में लैंड यूज बदलवाना अब आसान और सस्ता हो गया है। अगर आप 6000 वर्ग मीटर तक के क्षेत्रफल का भू-उपयोग परिवर्तन कराना चाहते हैं तो आपको लखनऊ का चक्कर नहीं लगाना होगा। योगी सरकार ने 6000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल सीमा तक के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार विकास प्राधिकरणों के बोर्ड को दे दिया है। शासन ने एक और बड़ी राहत यह दी है कि अब भू-उपयोग परिवर्तन का शुल्क भी काफी कम कर दिया है। ये दरें पांच प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक की गईं हैं। हालांकि इस बड़ी राहत के साथ यह भी शर्त रखी है कि किसी भी मौजूदा भू-उपयोग का सिर्फ एक प्रतिशत तक ही परिवर्तन बोर्ड कर सकता है।

अभी तक भू-उपयोग परिवर्तन कराने के लिए सारी फाइलों को शासन को ही भेजना पड़ता था। केडीए बोर्ड बस इसकी संस्तुति करता था। जब तक भू-उपयोग परिवर्तन होता था या इसके आवेदनों की फाइलों को निरस्त कर दिया जाता था तब तक विकास कार्यों से संबंधित सामग्रियों की दरें भी काफी बढ़ चुकी होती थीं। शासन ने 6000 वर्ग मीटर तक की जमीनों के आवेदकों को प्राधिकरण बोर्ड स्तर से ही हरी झंडी देने का अधिकार दे दिया है। इस संबंध में प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद का आदेश कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में भी पहुंच गया है। इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई है।

अब भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की किश्तों में भी राहत दी गई है। पहले इस शुल्क को चार तिमाही किस्तों में 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से साधारण ब्याज के साथ एक वर्ष में दिया जा सकता था मगर अब चार तिमाही किश्तों में एमसीएलआर प्लस वन प्रति वर्ष की दर से भुगतान किया जा सकेगा। उपाध्यक्ष को आवेदन करने पर यह अवधि एक वर्ष और बढ़ सकती है।

शासन ने यह भी शर्त रख दी है कि ग्रीन वर्ज और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित की गई जमीन का उपयोग नहीं बदला जाएगा। मसलन जो जमीन एसटीपी, पावर स्टेशन, बिजली घर, बस अड्डा, बस स्टॉप और पार्क आदि के लिए मास्टर प्लान में निर्धारित की गई है उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। यह भी देखा जाएगा कि जिस भू-उपयोग के मद की जमीन का भू-उपयोग परिवर्तित किया जाना है उसमें भी मास्टर प्लान में उस मद में दी गई कुल जमीन का एक प्रतिशत से ज्यादा आवेदन न हो।

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