राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में पुलिस का शिकंजा एसबीआई के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कसता जा रहा है। वर्तमान और पूर्व अधिकारियों, कर्मचारियों के दर्ज कराए अलग-अलग बयानों में भिन्नता से शक की सुई गहरा गई है। मंदिर ट्रस्ट और बैंक के बीच हुए एसओपी का अनुपालन कराना बैंक प्रबंधन की जिम्मेदारी थी, लेकिन जानबूझकर ऐसे हालात पैदा किए गए, जिससे कथित गणना कर्मियों का खेल निर्बाध चलता रहे। इसकी बड़ी वजह ये रही कि गणना कर्मियों में ट्रस्ट ही नहीं, बैंक अधिकारियों के भी खास कारिंदे शामिल थे। इन्हें मंदिर में दाखिल कराने के लिए बैंक प्रबंधन ने सैनिक सर्विसेज से इनकी सिफारिश तक की थी।

पुलिस अफसरों का कहना है कि चढ़ावे की चोरी में ट्रस्ट से कहीं ज्यादा बैंक प्रबंधन दोषी है। उनका कहना है कि बैंक सेवा प्रदाता एजेंसी थी, जिसका पूरा काम पेशेवर है। इस कार्य से बैंक की साख भी जुड़ी थी। फिर भी बैंक प्रबंधन एसओपी का अनुपालन कराने में पीछे रहा तो उसकी कोई मजबूरी नहीं बल्कि सीधे-सीधे लापरवाही है। बताया जा रहा है कि गणना कर्मियों के निर्धारित वस्त्र भी सिलवाने से परहेज किया गया।

पुलिस फिलहाल बैंक कर्मियों पर हाथ डालने से पहले पुख्ता सबूत जुटा लेना चाहती है। माना जा रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व न्यासी डॉ. अनिल मिश्र पर कोई आरोप तय होता है तो बैंक प्रबंधन भी उससे अछूता नहीं रहेगा। फिलहाल विवेचनाधिकारी/क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने अपने कार्यालय में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों को अलग-अलग बुलाकर उनका बयान दर्ज कराया है। यहां बैंक अधिकारी और कर्मचारी अपने विरोधाभासी बयानों में उलझ गए हैं।

पुलिस रिमांड पर लिए गए गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की चढ़ावा चोरी में सीधे तौर पर भूमिका सामने नहीं आई। सिंडिकेट बैंक से रिटायर्ड कर्मचारी सुभाष को लेकर पुलिस को बड़े सुराग भी हाथ नहीं लगे। हालांकि पुलिस टीम ने सुभाष के घर पर जाकर पूरी छानबीन की, लेकिन उन्हें कुछ खास नहीं मिला। पुलिस अफसरों की मानें तो सुभाष की पत्नी की तबीयत ठीक नहीं रहती है। उसकी पेंशन रुकने के कारण इलाज भी बाधित हो गया है। बताया गया कि उसका एक लड़का क्रिकेटर है, लेकिन वह भी स्थापित खिलाड़ी नहीं बन पाया।

दूसरी ओर एक अन्य आरोपी रमाशंकर मिश्रा को लेकर पुलिस पूरी तरह इत्मीनान में है कि वह प्रोफेशनल अपराधी है। उसने जो कृत्य किया है, वह सोच समझकर किया है। बताते हैं कि उसे अपने कृत्य के लिए किसी तरह का अपराध बोध भी नहीं है। पुलिस को अब की छानबीन में पता चल चुका है कि चोरी की घटना के मास्टरमाइंड में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश तिवारी और करुणेश पाण्डेय के अलावा मनीष यादव-रमाशंकर मिश्रा पूरी तरह संलिप्त थे। रामशंकर यादव टिन्नू ने अपने अधिकार का दुरुपयोग कर इनकी मदद की।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *