कुलपति प्रो. डॉ. देश दीपक ने युवाओं को बताया राष्ट्र निर्माण का दायित्व, लेफ्टिनेंट संदीप मोंगा ने दिया ‘एकता और अनुशासन’ का मंत्र
देहरादून, 07 अप्रैल 2026।
रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून में “राष्ट्रबोध” व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत “राष्ट्रीय एकरूपता, गुरुजनों, महिलाओं एवं संतों के प्रति सम्मान, श्रम का सम्मान एवं कार्य संस्कृति” विषय पर सुभारती दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। ललितादित्य प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना का प्रभावशाली संगम देखने को मिला, जिसमें छात्र-छात्राओं, संकाय सदस्यों एवं गणमान्य अतिथियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का आयोजन संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण के प्रेरणास्रोत विजन “राष्ट्रबोध से राष्ट्रभक्ति” के अनुरूप किया गया। इसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति गहरी आस्था विकसित करना रहा।
कार्यक्रम के प्रारंभ में निदेशक लोकप्रिय अस्पताल डॉ. जीवन आशा, डीन एकेडमिक्स प्रो. मनमोहन गुप्ता एवं संस्कृति विभाग के सचिव श्री विनय सेमवाल ने विशेष आमंत्रित वक्ता लेफ्टिनेंट संदीप मोंगा का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. देश दीपक ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्र की अखंडता, सुरक्षा और समृद्धि का दायित्व युवा शक्ति के कंधों पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रम का सम्मान, अनुशासन और उत्कृष्ट कार्य संस्कृति ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे राष्ट्रसेवा के उच्च आदर्शों को अपनाते हुए कर्तव्यनिष्ठ, संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनें।
विशेष आमंत्रित वक्ता लेफ्टिनेंट संदीप मोंगा (राष्ट्रीय कैडेट कोर) ने अपने प्रेरक उद्बोधन में NCC के मूल मंत्र “एकता और अनुशासन” को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अनुशासित जीवन, श्रम के प्रति सम्मान और उत्कृष्ट कार्य संस्कृति अपनाने की प्रेरणा दी।
व्याख्यान श्रृंखला में विश्वविद्यालय की अनामिका कंडारी, डॉ. राम निवास देशवाल, डॉ. नरेंद्र एवं श्रीमती ऋचा पुंडीर ने विषय के विभिन्न आयामों पर विस्तृत एवं सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए। विभिन्न व्याख्यान कक्षों में आयोजित सत्रों में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और संस्कारों की महत्ता को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में संस्कृति विभाग के सदस्य श्री रमन कृष्ण किमोठी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। “आज़ाद हिंद गीत” की गूंज के साथ कार्यक्रम का गरिमामय समापन हुआ। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के सचिव श्री विनय सेमवाल, डीन एकेडमिक्स प्रो. मनमोहन गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
यह आयोजन राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सम्मान एवं भारतीय संस्कृति के उच्च आदर्शों को सुदृढ़ करने वाला प्रेरणादायक मंच सिद्ध हुआ, जिसने विद्यार्थियों में राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठ जीवन जीने की नई ऊर्जा का संचार किया।
