मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार सुबह 10:30 बजे लोक भवन में कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। आगामी चुनावों के मद्देनजर इस बैठक को बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इसमें छात्र-छात्राओं, शिक्षामित्रों और बुनियादी ढांचे से जुड़े एक दर्जन से अधिक बड़े प्रस्तावों को मंजूरी मिल सकती है। सरकार का मुख्य फोकस युवाओं के डिजिटल सशक्तिकरण और लंबे समय से मानदेय वृद्धि की मांग कर रहे शिक्षाकर्मियों को राहत देने पर है।

योगी कैबिनेट आज ‘स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना’ के अगले चरण को हरी झंडी दे सकती है। इस प्रस्ताव के तहत प्रदेश के लगभग 25 लाख स्नातक, स्नातकोत्तर और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं को लैपटॉप और स्मार्टफोन वितरित किए जाने का रास्ता साफ होगा। बैठक में जैम (GeM) पोर्टल के माध्यम से होने वाली खरीद और इसकी अंतिम बिड (Bid) की सेवा-शर्तों को मंजूरी दी जा सकती है। सरकार ने इसके लिए बजट में पहले ही भारी भरकम राशि का प्रावधान किया है, ताकि युवाओं को डिजिटल रूप से साक्षर बनाया जा सके।

बैठक का दूसरा सबसे बड़ा एजेंडा प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षामित्रों और हजारों अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि करना है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में संकेत दिए थे कि अप्रैल 2026 से ही बढ़ा हुआ मानदेय लागू किया जाएगा। कैबिनेट इस प्रस्ताव पर मुहर लगाकर शिक्षाकर्मियों को होली के बाद एक और बड़ी खुशखबरी दे सकती है। माना जा रहा है कि मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि के साथ-साथ उनके लिए कुछ अन्य सुविधाओं (जैसे बीमा या अवकाश) पर भी चर्चा हो सकती है।

परिवहन विभाग से जुड़े प्रस्तावों में पीपीपी (PPP) मॉडल पर बस अड्डों के आधुनिक विकास को गति दी जाएगी। कैबिनेट बलरामपुर के तुलसीपुर और हाथरस में नए बस अड्डों के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की बेशकीमती जमीन परिवहन निगम को नि:शुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी देगी। इससे इन क्षेत्रों में यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकेंगी।

कैबिनेट के समक्ष औद्योगिक विकास, पीडब्ल्यूडी और आपदा राहत से जुड़े कई अन्य तकनीकी प्रस्ताव भी रखे जाएंगे। विशेष रूप से बांग्लादेश विभाजन के समय विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश में बसे परिवारों को आपदा राहत और पुनर्वास से जुड़े लाभ देने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। आज की बैठक में लिए गए निर्णय न केवल प्रदेश के विकास की रफ्तार बढ़ाएंगे, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के वोट बैंक को साधने में भी ‘डबल इंजन’ सरकार की मदद करेंगे।

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