गोमती नदी पर अवैध कब्जे को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ अपनाया सख्त रुख नीलांश वाटर पार्क सहित 7 पक्षों को नोटिस, तहसीलदार को 7 जुलाई तक कार्रवाई की डेडलाइन गोमती नदी संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम

कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में राज्य सरकार ने स्वीकार किया गोमती नदी के तटों पर नीलांश वाटर पार्क द्वारा दीवार बना कर कब्जा किया गया

लखनऊ, 19 मई 2026: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने गोमती नदी संरक्षण को लेकर ऐतिहासिक आदेश पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश माननीय अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति माननीय जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने गोमती नदी के तट पर हो रहे अतिक्रमण पर राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है सरकार ने माना अतिक्रमण, बेंच हुई नाराज सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि राज्य सरकार ने स्वयं गोमती नदी के तट पर अतिक्रमण पाया जाना माना है। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने पर माननीय उच्च न्यायालय की खंडपीठ नाराज हुई। कोर्ट ने पाया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत कार्यवाही को सिर्फ एक-एक कारण से विलंबित किया जा रहा है। याचिका पर विद्वान अधिवक्ता विनीत पांडेय की बहस के बाद आदेश जनहित याचिका संख्या 10/2024 – दीपक शुक्ला उर्फ तिरंगा महाराज बनाम राज्य उ.प्र. पर विद्वान अधिवक्ता विनीत कुमार पांडेय ने बहस की। अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष गोमती नदी पर हुए कब्जे से जुड़े सभी तथ्य और पुख्ता सबूत रखे। उनकी प्रभावी बहस के बाद ही माननीय न्यायालय ने यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता धर्मेन्द्र सिंह और विद्वान अधिवक्ता प्रदीप कुमार तिवारी भी उपस्थित रहे।कोर्ट के 3 बड़े निर्देश 1.नोटिस जारी: नीलांश वाटर पार्क सहित प्रतिवादी संख्या 10 से 16 को नोटिस जारी किया गया। इनकी ओर से विद्वान अधिवक्ता गिरीश चंद्र सिन्हा पेश हुए। 2 जवाब तलब: सभी प्रतिवादी 07.07.2026 तक प्रति शपथपत्र दाखिल करें। 3 तहसीलदार को सख्त निर्देश: तहसीलदार यह सुनिश्चित करें कि धारा 67 के तहत लंबित कार्यवाही 07.07.2026 तक विधि अनुसार निर्णीत हो जाए। अगली सुनवाई 7 जुलाई को
खंडपीठ ने याचिका को 07.07.2026 को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। यह आदेश गोमती नदी को कब्जा मुक्त कराने और उसके संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
राज्य का पक्ष: शासन की ओर से विद्वान अधिवक्ता अनिल कुमार चौबे, विद्वान अधिवक्ता मयंक सिन्हा, विद्वान अधिवक्ता सौरभ श्रीवास्तव, विद्वान अधिवक्ता दिलीप कुमार पांडेय और विद्वान अधिवक्ता मोहम्मद असलम खान उपस्थित रहे।
फैसले के बाद दीपक शुक्ला तिरंगा महाराज ने न्यायलय न्यायमूर्ति का जताया आभार
माननीय उच्च न्यायालय के फैसले के बाद गोमती नदी संरक्षण को लेकर संघर्ष कर रहे दीपक शुक्ला उर्फ तिरंगा महाराज ने माननीय न्यायालय और न्यायमूर्ति का धन्यवाद करते हुए प्रणाम कहा। तिरंगा महाराज ने कहा, “न्यायालय पर हमें पूर्ण रूप से भरोसा था और आज विद्वान अधिवक्ता श्री विनीत कुमार पांडे जी के द्वारा न्यायालय में जो तथ्य रखे गए उसके बाद न्याय की जीत हुई है। अब मां गोमती नदी कब्जा मुक्त होगी जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए बल मिलेगा। नदी हमारी मां है, जीवनदायिनी है। नदी पर किसी भी प्रकार का कब्जा उचित नहीं है।” तिरंगा महाराज लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण को लेकर कार्य कर रहे हैं। 2014 से वह नदी बचाने को लेकर हर दर पर मत्था टेक रहे थे और गोमती नदी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। न्यायालय के फैसले से तिरंगा महाराज और क्षेत्र में खुशी की लहर है। तिरंगा महाराज ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की न्यायालय से सीबीआई जांच की भी मांग करेंगे कि किन-किन तत्वों द्वारा नदी पर कब्जा कराया गया। उन पर भी कठोर कार्रवाई हो।

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