दिल्ली की रोहिणी जिला अदालत ने वर्ष 2021 में मंगोलपुरी थाना क्षेत्र में हुई चर्चित हत्या के मामले में आरोपी नितिन उर्फ आशु को नियमित जमानत प्रदान कर दी है। आरोपी पिछले साढ़े चार साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में था। उस पर ‘नवासा गैंग’ और ‘चीकू गैंग’ के बीच चली आ रही खूनी दुश्मनी के चलते जफर उर्फ आजाद की सार्वजनिक रूप से गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगाया गया था।
सीसीटीवी फुटेज को बताया गया था अहम सबूत
अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी थी कि घटना के दौरान आरोपी द्वारा फायरिंग किए जाने की पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई है और यही उसके खिलाफ सबसे मजबूत साक्ष्य है। हालांकि, जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान जब अदालत ने फुटेज को चलाकर देखा, तो उसमें आरोपी की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी।
चेहरा स्पष्ट नहीं, निर्णायक सबूत नहीं
अदालत ने टिप्पणी की कि सीसीटीवी फुटेज में व्यक्ति का चेहरा साफ नजर नहीं आता। भले ही पहचान से जुड़ा प्रश्न ट्रायल के दौरान तय किया जाएगा, लेकिन इस चरण पर फुटेज को निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सकता। मुनीश गर्ग की अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि मामले में कुल 34 गवाह हैं, लेकिन साढ़े चार साल बीत जाने के बावजूद अब तक केवल पांच गवाहों के बयान ही दर्ज हो पाए हैं।
लंबे समय तक हिरासत उचित नहीं
अदालत ने कहा कि ट्रायल के पूरा होने में अभी काफी समय लग सकता है और ऐसे हालात में किसी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्यायसंगत नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने नितिन को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।
जांच में खामियों की ओर इशारा
बचाव पक्ष के वकील रवि दराल ने पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कई तकनीकी खामियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि घायल का बयान दर्ज कराने के लिए डॉक्टर से राय लेने संबंधी आवेदन पर घटना से एक माह पूर्व की तारीख अंकित थी, जबकि वारदात मई 2021 में हुई थी। इस विरोधाभास ने जांच प्रक्रिया पर संदेह पैदा किया।
इसके अलावा, पुलिस के उस दावे पर भी सवाल उठाए गए जिसमें एक पुलिसकर्मी की घटनास्थल पर मौजूदगी बताई गई थी, जबकि ड्यूटी रिकॉर्ड के अनुसार उस समय उसकी शिफ्ट समाप्त हो चुकी थी। अदालत ने इन कमियों के साथ-साथ आरोपी के लंबे समय से जेल में होने के तथ्य को भी ध्यान में रखा।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया था, लेकिन अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार के बाद आरोपी को राहत देने का फैसला सुनाया।
