टी-20 विश्व कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कोलंबो में प्रस्तावित इस मैच पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और बीसीसीआई पर कड़ा हमला बोला है। कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई दलों ने दुश्मन देश के साथ क्रिकेट खेलने को लेकर आपत्ति जताई है।

इस विवाद के बीच पाकिस्तान ने पहले बांग्लादेश के समर्थन में मैच के बहिष्कार का ऐलान किया था, हालांकि बाद में उसने अपना फैसला बदल लिया। आईसीसी प्रमुख जय शाह के नाम को लेकर भी विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है, क्योंकि उनके पिता अमित शाह हैं।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह मुकाबला राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की भावनाओं के खिलाफ है। पंजाब के गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पाकिस्तान भारत का दुश्मन देश है और सीमा पर प्रॉक्सी युद्ध लड़ रहा है। ऐसे में उसके साथ किसी भी तरह का समझौता या खेल आयोजन नहीं होना चाहिए।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने और भी तीखा बयान देते हुए कहा कि यह भारत बनाम पाकिस्तान का मैच नहीं, बल्कि ‘जय शाह बनाम पाकिस्तान’ का मुकाबला है। उन्होंने दावा किया कि आम जनता इस मैच के पक्ष में नहीं है और इसके पीछे सट्टेबाजी व आर्थिक हित जुड़े हो सकते हैं। मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राउत ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।

विवाद तब और बढ़ गया जब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने मैच खेलने और आईसीसी अधिकारियों से बातचीत के संकेत दिए। इससे पहले बांग्लादेश की वेन्यू शिफ्ट की मांग ठुकराए जाने पर पाकिस्तान ने एकजुटता दिखाते हुए बहिष्कार की घोषणा की थी, लेकिन बाद में चर्चा और मित्र देशों की अपील के बाद उसने रुख बदल लिया।

इसी बीच एशिया कप में ट्रॉफी विवाद और हैंडशेक नीति जैसे मुद्दों ने भी दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ाया है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार एक ओर पाकिस्तान को दुश्मन बताती है, वहीं दूसरी ओर क्रिकेट में उसके साथ खेलने की अनुमति देती है।

फिलहाल सरकार या बीसीसीआई की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जहां क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह मुकाबला रोमांचक माना जा रहा है, वहीं राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इसे विवादों के घेरे में ला खड़ा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि खेल और राजनीति के इस टकराव से भारत-पाक संबंधों में तनाव और गहरा सकता है। कुल मिलाकर, यह मुकाबला अब सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि सियासी बयानबाज़ी का भी केंद्र बन गया है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *