यूपी विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। इस मौके पर सीएम ने सपा सरकार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके शिक्षा मंत्री पं राम प्रसाद बिस्मिल और भारत रत्न बिस्मिल्ला खां में भ्रमित हो गए थे। अंधेर नगरी, चौपट राजा यही था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए विपक्षी दल के कार्यकाल के दौरान शिक्षा विभाग में प्रशासनिक अव्यवस्था और गंभीरता की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के शासनकाल में एक ऐसी स्थिति देखी थी, जहां माध्यमिक शिक्षा मंत्री को विभाग के अधिकारी ने पहचाना तक नहीं था। एक घटना को जिक्र करते हुए कहा कि जब वह गोरखपुर से सांसद थे और एक रेलवे स्टेशन पर गए थे, उस वक्त वहां कुछ अधिकारी भी मौजूद थे।

उन्होंने कहा, ‘उसी वक्त सपा सरकार के माध्यमिक शिक्षा मंत्री भी आ गए। मुझे यह देखकर हैरानी हुई कि अधिकारी मंत्री का अभिवादन करने के लिए खड़े भी नहीं हुए।’ योगी ने सपा सदस्यों की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘जब मैंने एक अधिकारी से पूछा कि क्या वह मंत्री के साथ आया था तो अधिकारी ने जवाब दिया, कौन से मंत्री? जब मैंने मंत्री की तरफ इशारा किया तो उन्होंने खुद कहा कि वह छह महीने से दफ्तर नहीं गये हैं और शायद इसलिए अधिकारियों ने उन्हें नहीं पहचाना।’

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर हुए एक किस्से का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के एक शिक्षा मंत्री को कार्यक्रम में बुलाया गया था। जब उन्हें बताया गया कि यह राम प्रसाद बिस्मिल का शहीदी दिवस है तो मंत्री ने उन्हें बिस्मिल्ला खां समझ लिया और कहा कि बिस्मिल्ला खां को हाल ही में एक अवॉर्ड मिला है और सवाल किया कि उन्हें फांसी कैसे दी जा सकती है। जब मौजूद लोगों में से किसी ने मंत्री को यह कहकर टोका कि बात तो पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की थी, बिस्मिल्ला खां का नहीं। इस पर सपा के मंत्री ने उस व्यक्ति पर भारतीय जनता पार्टी का समर्थक होने का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था, धार्मिक परंपराओं और विपक्ष के रुख को लेकर भी तीखे बयान दिए। प्रयागराज में कुंभ मेले के दौरान हुई घटना पर बोलते हुए कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। योगी ने कहा कि चार पीठों की परंपरा और वेदों की मर्यादा निर्धारित है, जिसे आदि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने स्थापित किया था। नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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