दिल्ली में पलूशन लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार सुबह दिल्ली के बवाना में सबसे ज्यादा 497 AQI दर्ज किया गया। दिल्लीवासियों के साथ पर्यावरणप्रेमी भी चिंता में हैं। मशहूर पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी ने दिल्ली-एनसीआर में लागू किए गए ग्रैप-4 की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे लंबे समाधान के बजाय एक रिएक्टिव कदम बताया। राजधानी में वायु गुणवत्ता बेहद खराब होने के बाद GRAP के स्टेज-4 को लागू किए जाने के संदर्भ में कंधारी ने कहा कि यह समस्या अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि वर्षों की नीतिगत विफलताओं का नतीजा है।

रविवार को एएनआई से बातचीत में भावरीन कंधारी ने कहा, “GRAP हम जानते हैं, यह एक प्रतिक्रियात्मक उपाय है। जब हालात बहुत खराब हो जाते हैं, तब GRAP-IV लागू किया जाता है। वर्षों से नीति निर्माताओं द्वारा लिए गए फैसलों का नतीजा आज हम देख रहे हैं। यह कोई रातों-रात पैदा हुई स्थिति नहीं है। कुछ दिनों बाद जब AQI के आंकड़े नीचे आएंगे, तो GRAP हटा लिया जाएगा। यह किसी भी तरह से समाधान नहीं है।”

बता दें कि शनिवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘सीवियर प्लस’ यानी 450 के करीब पहुंचने के बाद GRAP के स्टेज-4 को लागू करने का फैसला लिया। आयोग के आदेश के मुताबिक, शनिवार शाम 4 बजे AQI 431 दर्ज किया गया था, जो बढ़कर शाम 6 बजे 446 तक पहुंच गया।

CAQM ने बताया कि हवा की रफ्तार कम होना, वातावरण का स्थिर रहना, प्रतिकूल मौसम और प्रदूषकों का फैलाव न हो पाना—इन सभी कारणों से वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। इसे देखते हुए आयोग की उप-समिति ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में तत्काल प्रभाव से GRAP स्टेज-4 लागू करने का निर्णय लिया। यह पहले से लागू स्टेज-1, 2 और 3 के अतिरिक्त है। आयोग ने NCR के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और संबंधित एजेंसियों को अतिरिक्त निवारक कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि वायु गुणवत्ता और अधिक खराब न हो।

इस बीच, रविवार सुबह दिल्ली घने स्मॉग की चादर में लिपटी नजर आई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सुबह 7 बजे दिल्ली का औसत AQI 461 दर्ज किया गया, जो ‘सीवियर’ श्रेणी में आता है। यह स्थिति तब है, जब GRAP-IV पहले से लागू है। शहर के कई इलाकों गाजीपुर, आईटीओ और आनंद विहार में घना धुंध छाया रहा, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई। CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता अब भी ‘सीवियर’ श्रेणी में बनी हुई है।

सुबह 7 बजे बवाना में सबसे खराब AQI 497 दर्ज किया गया। वहीं नरेला में AQI 492 और ओखला फेज-2 में 474 रिकॉर्ड किया गया। इसके मुकाबले एनएसआईटी द्वारका में AQI 411 रहा, जो शहर में सबसे कम दर्ज किया गया। कुल मिलाकर, राजधानी में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति बनी हुई है और विशेषज्ञ लगातार अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी और ठोस नीतिगत कदमों की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

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