प्रदेश के पालीटेक्निक संस्थानों में इस वर्ष ट्रेड सेलेक्शन में छात्राओं का रुझान तेजी से बदलता नजर आ रहा है। छात्राएं अब केवल पारंपरिक ट्रेडों तक सीमित नहीं हैं।
संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद (जेईईसीयूपी) की तीसरे चरण की काउंसिलिंग के बाद सामने आए आंकड़ों से स्पष्ट है कि छात्राएं अब केवल पारंपरिक ट्रेडों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रानिक्स जैसी कोर इंजीनियरिंग शाखाओं में भी बड़ी संख्या में प्रवेश ले रही हैं। पिछले वर्षों की तुलना में इन ट्रेडों में छात्राओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।
करीब 1.80 लाख अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग प्रक्रिया में इस बार छात्राओं की भागीदारी पहले की तुलना में काफी अधिक रही। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के आंकड़ों के अनुसार, छात्राओं के प्रवेश में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चौथे चरण की काउंसिलिंग 27 जुलाई से शुरू होगी, जबकि पांचों चरण पूरे होने के बाद अंतिम तस्वीर और स्पष्ट होगी।
लखनऊ पालीटेक्निक के मैकेनिक विभाग के अनिल कुमार ने बताया में कि पहले जहां मैकेनिकल इंजीनियरिंग ट्रेड में केवल दो से तीन छात्राएं ही प्रवेश लेती थीं, वहीं इस बार यह संख्या 10 से अधिक पहुंच गई है।
सिविल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रानिक्स ट्रेडों में भी छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राजकीय महिला पालीटेक्निक में भी प्रवेश लेने वाली छात्राओं की संख्या इतनी बढ़ गई है कि छात्रावासों के आवंटन में अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है। इससे स्पष्ट है कि तकनीकी शिक्षा के प्रति छात्राओं का विश्वास बढ़ा है और वे रोजगार की बेहतर संभावनाओं वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही हैं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व करियर काउंसलर डीके वर्मा ने बताया कि उद्योगों में तकनीकी पदों पर बढ़ती मांग, बेहतर प्लेसमेंट और आकर्षक वेतन पैकेज के कारण छात्राओं का रुझान कोर इंजीनियरिंग ट्रेडों की ओर बढ़ा है। इससे भविष्य में औद्योगिक क्षेत्र में महिला तकनीशियनों और इंजीनियरों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है।
पालीटेक्निक प्लेसमेंट अधिकारी एसपी सोनी ने बताया कि अब छात्राएं पारंपरिक ट्रेडों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिक जैसी ट्रेडों में रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ी हैं। उद्योगों में इन शाखाओं के डिप्लोमा धारकों की मांग अधिक है। यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में छात्राओं ने इन ट्रेडों को प्राथमिकता दी है। आने वाले वर्षों में यह बदलाव और तेज होगा।
