श्रीराम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पारंपरिक निगरानी से आगे निकलकर अब पूरी तरह तकनीक आधारित होगी। पूरा परिसर एआई कैमरे, स्मार्ट सेंसर, वॉच टावर और रियल-टाइम निगरानी प्रणाली के जरिए बहुस्तरीय सुरक्षा कवच से लैच किया जाएगा। मंदिर के लिए इस नई व्यवस्था पर गंभीरता से मंथन शुरू हो चुका है। इसके जरिए मंदिर की न सिर्फ बाहरी सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि परिसर के भीतर की हर गतिविधि की पूरी मुस्तैदी से निगरानी होगी। मंदिर की सुरक्षा का आधार सिर्फ सुरक्षाकर्मी नहीं, बल्कि एआई, डेटा एनालिसिस, रियल-टाइम इंटेलिजेंट सर्विलांस सिस्टम बनेंगे। जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में एक प्रस्ताव शासन भी भेजा गया है।
मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे एआई अपग्रेड किए जाएंगे। ये सिर्फ रिकॉर्डिंग तक ही नहीं, बल्कि भीड़ में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, असामान्य व्यवहार का विश्लेषण, श्रद्धालुओं की संख्या का रियल-टाइम आकलन और सुरक्षा कर्मियों को तत्काल अलर्ट भेजेंगे। इसकी मदद से किसी भी संभावित खतरे पर फौरन कार्रवाई संभव होगी।
सुरक्षा दीवार के साथ 25 वॉच टावर बनाए जाने हैं। चार किमी लंबी बाउंड्री में चार सौ मीटर तैयार हो चुकी है। इतने में ही तीन टावर तैयार किए गए हैं। इनकी ऊंचाई 25 से 37 फीट तक होगी, ताकि पूरे मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों पर व्यापक निगरानी रखी जा सके। साथ ही आधुनिक सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपकरण पूरे सुरक्षा नेटवर्क और अधिक प्रभावी बनाएंगे।
सुरक्षा व्यवस्था में यह बदलाव हाल में सामने आए दान गिनती केंद्र में कथित चोरी के मामले के बाद तेज हुआ है। एसआईटी रिपोर्ट में एक महीने से अधिक की सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में लगभग 70 संदिग्ध घटनाओं का उल्लेख है। जांच में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के उल्लंघन, कमजोर तलाशी व्यवस्था, अपर्याप्त निगरानी और कैश काउंटिंग प्रक्रिया में प्रभावी मॉनिटरिंग के अभाव जैसी कमियां मिली हैं। साथ ही चढ़ावा प्रबंधन की निगरानी अफसरों की जवाबदेही पर भी सवाल उठे हैं।
राममंदिर की सुरक्षा की समीक्षा के लिए राममंदिर परिसर में हर तीन माह में उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक होती है। अयोध्या के सीनियर पुलिस अफसरों का कहना है कि यह बैठक जल्द होगी। तारीख शासन से तय होती है। इसमें एडीजी सुरक्षा, एडीजी जोन, आईबी के निदेशक, सीआरपीएफ के कमांडेंट, पीएसी के कमांडेंट, एसएसएफ के कमांडेंट, कमिश्नर, डीएम आदि रहते हैं। आगामी बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दिलाकर काम बढ़ाया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स की छठी बटालियन के तहत 1,155 स्थायी पदों के सृजन को मंजूरी दी है। इनमें कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट, असिस्टेंट कमांडेंट, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, हेड कॉन्स्टेबल, कॉन्स्टेबल, ड्राइवर, कंप्यूटर ऑपरेटर, तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ के पद शामिल हैं।
राममंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच मंदिर परिसर में तैनात रहे आरएमओ अर्जुन देव की खूब चर्चा रही। चंपत राय के करीबी अर्जुन मंदिर में 17 वर्षों तक तैनात रहे। हिन्दुस्तान में खबर छपने के अगले दिन ही अर्जुन देव का ट्रांसफर गोरखपुर हो गया था। विचार मंथन में सामने आया कि कुछ अधिकारी लंबे समय तक एक ही संवेदनशील जगह तैनात रहे, जिससे संस्थागत निगरानी प्रभावित हो सकती है। इसे देखते हुए भविष्य में महत्वपूर्ण सुरक्षा और निगरानी पदों पर अधिकारियों के नियमित स्थानांतरण और जिम्मेदारियों के रोटेशन की नीति पर भी विचार किया जा रहा है।
