श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी में रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस की जांच में यह भी तथ्य सामने आया है कि चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव ने बेनामी संपत्ति बनाई है। किराएदार महेश के पास कथित तौर पर मिली संपत्ति को भी टिन्नू से ही जोड़ कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि रिमांड के दौरान टिन्नू यादव से इस मुद्दे पर भी पुलिस पूछताछ करेगी।
चढ़ावा चोरी की शुरुआती जांच के समय से ही यह बातें सामने आने लगी थीं कि आरोपियों ने बेनामी संपत्तियों में पैसा लगाया है। एसआईटी ने भी अपनी जांच में इस ओर इशारा किया था। चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव के पास एक लाख रुपये की बरामदगी दिखाई गई। अयोध्या की स्वर्ग गली का घर भी इतना बड़ा नहीं है कि सामान्य तौर पर उसकी भूमिका साबित की जा सके। अयोध्या में ही उसका 14 कमरों का एक हॉस्टल जरूर है लेकिन इस संबंध में टिन्नू के परिवार ने दावा किया कि इसे 2008 में ही बनवाया गया था। तब तो मंदिर निर्माण की शुरुआत नहीं हुई थी। जांच के क्रम में ही मंदिर में टैली शीट का काम करने वाले बस्ती के महेश कुमार का नाम सामने आया।
यह टिन्नू यादव के हॉस्टल में किराएदार बताया जा रहा है। पुलिस ने इसे भी जांच के दायरे में ले लिया है। पता चला है कि बस्ती में महेश ने हाल में ही लाखों रुपये की जमीन खरीदी थी। यह सौदा चढ़ावा चोरी उजागर होने के बाद किया गया।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच अब आरोपियों के कथित आर्थिक निवेश और उनके करीबी नेटवर्क तक पहुंच गई है। पुलिस को आशंका है कि मुख्य आरोपियों ने परोक्ष रूप से जमीन के कारोबार में भी निवेश किया हो सकता है। इसी संभावना के मद्देनजर जांच एजेंसियां अब उनके नजदीकी लोगों और जमीन के कारोबार से जुड़े संपर्कों की गहन पड़ताल कर रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच में विशेष रूप से अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला और रामशंकर यादव टिन्नू यादव के बेहद करीबी लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। बताया जाता है कि शहर के तीन चर्चित जमीन कारोबारियों से इनके संपर्क रहे हैं। नवाबगंज क्षेत्र में सक्रिय कुछ जमीन कारोबारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई है।
पुलिस विभिन्न जमीन सौदों से जुड़े दस्तावेज जुटा रही है। संबंधित रजिस्ट्रियों के कागजात मंगवाए जा रहे हैं और उनमें खरीदार, विक्रेता के साथ-साथ गवाहों तक का सत्यापन किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं आरोपियों का निवेश किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से तो नहीं किया गया। सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी जमीन सौदे या कारोबारी का आरोपियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। फिलहाल पुलिस आर्थिक लेनदेन, संपत्ति निवेश और करीबी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि जमीन का सौदा नगद किया गया या फिर किसी बैंक खाते से भुगतान किया गया। महेश की व्यक्तिगत आमदनी इतनी नहीं कि वह लाखों की जमीन खरीद सके। इस नाते भी संदेह गहरा गया है। आशंका जताई जा रही है कि टिन्नू ने महेश के जरिए चढ़ावा चोरी में मिली रकम बेनामी संपत्ति में खपाई। उसका रहन सहन भी हाल में बदल गया था। वह लग्जरी गाड़ियों से गांव पहुंचता था, जबकि उसकी खुद और परिवार की स्थिति ऐसी नहीं है। यह भी बताया गया कि उसका पिता सैलून चलाता है। इससे भी माना जा रहा है कि टिन्नू ने महेश के जरिए चढ़ावा चोरी की रकम संपत्ति में लगाई।
महेश की गांव में ही नहीं, आसपास के जिलों में भी संपत्ति की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान टिन्नू यादव से बेनामी संपत्ति पर भी पूछताछ होगी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की संपत्ति का सत्यापन कराया जा रहा है। आसपास के जिलों से भी रिपोर्ट मांगी गई है। आय से अधिक संपत्ति जुटाई होगी तो पूछताछ होना स्वाभाविक है। टिन्नू यादव से भी इस संबंध में पूछताछ की जाएगी। यदि आय का स्रोत नहीं बता पाया तो माना जाएगा कि चढ़ावे की चोरी की रकम बेनामी संपत्ति में ही खपाई है।
