फव्वारा दवा बाजार में छापेमारी में औषधि विभाग ने एक वर्ष में छापेमारी में तीन नकली दवा के सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। ये फार्मा कंपनी से 10 डिब्बे खरीदते थे, इन डिब्बों के बैच नंबर और क्यूआर कोड से पुडुचेरी, रुड़की की अवैध फैक्ट्री में एक हजार नकली डिब्बे तैयार कराते थे।
आधा दर्जन थोक दवा की फर्मों से बिलों को डायवर्ट कर कर एक हजार डिब्बों की कोलकाता, दिल्ली, लखनऊ के साथ ही हरियाणा और राजस्थान के थोक दवा कारोबारियों को सप्लाई करते थे। पिछले वर्ष अगस्त में औषधि विभाग की टीम और एसटीएफ ने हे मां मेडिको से जाइडस, सन फार्मा, जीएसके, ग्लेनमार्क सहित आधा दर्जन कंपनियों की दवाओं के नकली होने की आशंका पर जब्त किया था।
नकली दवाओं के क्यूआर कोड को दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने स्कैन किया तो बैच नंबर सहित कंपनी का पूरा ब्योरा मिल गया। इससे औषधि विभाग की टीम भी चकरा गई। इसके बाद जांच की गई, जांच में दवा कंपनी से ज्यादा बिकने वाली दवाओं के 10 डिब्बे थोक दवा कारोबारी अपनी फर्म के नाम पर खरीदते थे।
इनके बैच नंबर और क्यूआर कोड से पुडुचेरी, रुड़की के साथ ही उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की अवैध फैक्ट्री में फार्मा कंपनी से खरीदी गई दवा के बैच नंबर और क्यूआर कार्ड से एक हजार नकली डिब्बे तैयार कराते थे। अपने रिश्तेदारों की आधा दर्जन थोक दवा की फर्मों के नाम पर 20- 20 नकली दवाओं के डिब्बों की बिलिंग करते थे।
इस तरह बिलों को पांच से छह थोक की दुकानों पर डायवर्ट करने के बाद बाजार में बेचते थे। औषधि विभाग की टीम की छापेमारी में दवा पकड़े जाने पर कारोबारी बिल दिखा देते थे,औषधि विभाग की टीम दो से तीन स्तर पर ही बिलों की चेन चेक करती थी इससे नकली दवा पकड़ी नहीं जातीं थी। पुडुचेरी की फैक्ट्री में नकली दवा बनाने में फार्मा कंपनी के साल्ट के फार्मूला को काॅपी किया गया।
इसके चलते औषधि विभाग की टीम द्वारा लिए गए 28 में से 27 नमूने पास हो गए थे। मई में पकड़े गए सिंडिकेट ने रुड़की में नकली आक्साल्जिन-डीपी टैबलेट तैयार कराई गई। इसे बाजार में बिलों को डायवर्ट कर खपाया गया। 11 जुलाई को जिस सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है उसने चाइमोरल फोर्ट टैबलेट नकली तैयार कराने के बाद बिल डायवर्ट कर बिक्री की गई।
सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि फार्मा कंपनियों से बिल से दवा खरीदने के बाद उसी बैच नंबर की नकली दवा बनाकर बाजार में खपाई जा रही हैं। एक वर्ष में 76.13 करोड़ की संदिग्ध दवाएं सील की गई। 58 थोक की दुकानों के लाइसेंस निलंबित और निरस्त किए गए हैं।
थोक दवा कारोबारी ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इन दवाओं को खरीद कर ले जाते हैं। एक्सपायर दवाओं की भी रीलेबलिंग कर बाजार में हास्पिटल सप्लाई की दवाएं बताकर बेचा गया।
