चढ़ावा चोरी के मामले की जांच कर रही एसआईटी की टीम ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धर्म सेना के अध्यक्ष संतोष दुबे से आवश्यक जानकारी हासिल की है।

रामलला के चढ़ावा चोरी का प्रकरण सामने आने के साथ संतोष दुबे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के घोर आलोचक बने हुए हैं।

हालांकि उनके ट्रस्ट पर आरोप चढ़ावा चोरी तक ही नहीं है, वह ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई भूमि पर भी सवाल उठा रहे हैं और उनका आरोप है कि ट्रस्ट ने भूमि खरीद में करोड़ों की हेराफेरी की है।

ट्रस्ट ने सोमवार को संतोष दुबे को चढ़ावा चोरी से संबंधित साक्ष्य के साथ लखनऊ बुलाया है। संतोष दुबे आज एसआईटी को ट्रस्ट के खिलाफ सबूत सौंपेंगे।

संतोष दुबे धर्म सेना के अध्यक्ष हैं और राम जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन से भी जुड़े रहे हैं। साथ ही वह विवादित ढांचा गिराए जाने के आरोपी भी रहे हैं।

बता दें कि एसआईटी की प्राथमिक रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद अब एक और चर्चा गर्म है। यह चर्चा ट्रस्ट की व्यवस्था में कार्य विभाजन से संबंधित है। ट्रस्ट में तत्कालीन महासचिव चंपतराय सहित 15 ट्रस्ट सदस्य थे लेकिन शायद ही इनके बीच कार्य विभाजन तार्किक ढंग से नहीं हुआ।

प्रत्यक्ष रूप से चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्र व गोपाल राव का नाम ही मंदिर की व्यवस्था से जोड़ा जाता रहा। प्रत्येक कार्यक्रम व व्यवस्था में यही देखे जाते थे। भले ही ट्रस्टियों में कार्य विभाजन होने का दावा हो, लेकिन एसआईटी की प्राथमिक जांच रिपोर्ट ने इस दावे को आईना दिखा दिया है।

12 जुलाई रविवार को गणना नहीं की गई। इससे जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस व्यवस्था के लागू होने से कर्मचारियों को आराम मिलेगा वह आसानी से नई बने गणना नियमावली का पालन भी कर सकेंगे। इन दोनों 18 से 20 लाख रुपए नित्य चढ़ावा में आ रहा हैं।

सूत्रों ने बताया कि ट्रस्ट की 22 जुलाई को प्रस्तावित बैठक में अंतरिम महासचिव के स्थान पर पूर्णकालिक महासचिव की नियुक्ति के साथ ही रिक्त पदों पर भी नए सदस्यों का चयन होगा।

इसके लिए कुछ नामाें पर विचार भी किया जा रहा है और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर भी रामनगरी के संतों का मंतव्य भी लिया जा रहा है।

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