विपक्षी दलों में लगातार हो रही टूट की सियासी घटना ने केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के हौसलों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। सरकार में यह भरोसा लगातार बढ़ रहा है कि अगले महीने शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र तक वे संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लेंगे।

द टेलीग्राफ ने अपनी एक रिपोर्ट में एक केंद्रीय मंत्री के हवाले से बताया, “हमें पूरा भरोसा है कि मॉनसून सत्र तक हम महिला आरक्षण को लोकसभा और विधानसभा सीटों के नए परिसीमन से जोड़ने वाले संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी संख्या बल जुटा लेंगे।”

केंद्र सरकार दो बेहद महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयकों को संसद से हरी झंडी दिखाने की तैयारी में है, जिनके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य है। महिला आरक्षण और परिसीमन। इस कानून के जरिए देश में महिला आरक्षण को लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और सीमाओं को दोबारा तय करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।

बीजेपी साल 2029 के आम चुनाव से काफी पहले पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का कानून बनाना चाहती है। बीजेपी रणनीतिकारों का मानना है कि एक साथ चुनाव होने से पार्टी को राज्य चुनावों में भी राष्ट्रीय मुद्दों जैसि कि सुरक्षा, संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव पर वोट मांगने का सीधा लाभ मिलेगा।

540 की प्रभावी संख्या वाली वर्तमान लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोटों की आवश्यकता है। लोकसभा में एनडीए की वर्तमान ताकत 293 है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 28 में से 20 बागी सांसदों के जुड़ने की उम्मीद है। वहीं, शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 बागी सांसदों के आने की संभावना है। इन दोनों को मिलाकर यह आंकड़ा 319 तक पहुंच जाता है, जो अभी भी 360 के लक्ष्य से दूर है। हालांकि बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने निजी बातचीत में बताया है कि वह इस बात से पूरी तरह आश्वस्त हैं कि 37 लोकसभा सांसदों वाली समाजवादी पार्टी (SP) सहित कई अन्य विपक्षी दल अगले कुछ हफ्तों में बड़ी बगावत का स्वाद चखने वाले हैं।

भाजपा के एक सूत्र ने कहा, “अगले कुछ हफ्तों में कई विपक्षी दलों के भीतर ऐसे राजनीतिक भूकंप आने वाले हैं, जो उन्हें अंदर से पूरी तरह खोखला कर देंगे।”

245 सदस्यीय राज्यसभा में एनडीए दो-तिहाई के जादुई आंकड़े 164 के बेहद करीब पहुंच चुका है। एनडीए की मौजूदा ताकत 152 सीटों की है। आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों के दलबदल और 18 जून के चुनाव परिणामों ने एनडीए को भारी मजबूती दी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में मजबूत स्थिति के चलते, टीएमसी के तीन सांसदों के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर भी बीजेपी की जीत तय मानी जा रही है।

विपक्ष को डर है कि पूरे देश में होने वाला यह नया परिसीमन बीजेपी को एक स्थायी संरचनात्मक लाभ दे सकता है। विपक्षी दल असम में हुए परिसीमन का उदाहरण देते हैं, जहां कुछ खास आबादी वाले क्षेत्रों की सीमाओं को इस तरह बदला गया जिससे विपक्ष की पारंपरिक सीटों का गणित बिगड़ गया। लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्र ने भी सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए विपक्षी नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों को मनमाने ढंग से बदलने का आरोप लगाया था।

हालांकि, सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है। सरकार का तर्क है कि 1971 की जनगणना के बाद से आबादी में भारी बढ़ोतरी के बावजूद सीटें नहीं बढ़ाई गई हैं, इसलिए यह सुधार अब अपरिहार्य हो चुका है। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि विपक्षी दलों को तोड़ना और देश के राजनीतिक परिदृश्य को बदलने वाले ऐतिहासिक कानूनों को पारित कराना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस विरासत का हिस्सा है, जिसे वे देश के सामने छोड़ना चाहते हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *