श्री कुमार षष्ठी (स्कंद षष्ठी) के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में भगवान कार्तिकेय के विग्रह का विशेष पूजन-अर्चन आज वैदिक रीति-रिवाजों एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान के अनुसार संपन्न किया गया। इस अवसर पर मंदिर के विद्वान आचार्यों एवं शास्त्रियों ने भगवान कार्तिकेय का मंत्रोच्चार, पूजन, अर्चन तथा विशेष अनुष्ठान श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया।

पूजन के दौरान भगवान कार्तिकेय के श्रीचरणों में पुष्प, फल एवं नैवेद्य अर्पित कर समस्त जनकल्याण, सुख-समृद्धि एवं राष्ट्र की उन्नति की मंगलकामना की गई। स्कंद षष्ठी का पर्व भगवान शिव एवं माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय की आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन भगवान कार्तिकेय के पूजन से साहस, तेज, विजय तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

पूजन-अर्चन के उपरांत मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान कार्तिकेय की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। सम्पूर्ण आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान कार्तिकेय के प्रति अपनी भक्ति प्रकट की और उनके आशीर्वाद की कामना की।

मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ लगी रही, जहां सभी ने एक-दूसरे के साथ मिलकर इस पावन अवसर का आनंद लिया। इस दिन विशेष रूप से भगवान कार्तिकेय की महिमा का गुणगान किया गया और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई।

इस आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं ने भगवान कार्तिकेय के प्रति अपनी आस्था को और भी मजबूत किया। उन्होंने इस अवसर पर अपने परिवार और समाज के कल्याण के लिए प्रार्थना की।श्री कुमार षष्ठी के इस पावन पर्व ने सभी भक्तों को एकत्रित किया और उन्हें एक नई ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान की। भगवान कार्तिकेय की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।

इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रगाढ़ किया, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया। सभी भक्तों ने मिलकर इस पर्व को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रकार, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान कार्तिकेय का पूजन एक अद्भुत अनुभव बना।

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