राष्ट्रीय संपदा गोमती नदी की सरकारी भूमि पर 14 वर्षों से चल रहे अवैध अतिक्रमण और पारिस्थितिकी को पहुंची अपूरणीय क्षति का मामला अब प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता जनहित याचिका संख्या 10/2024 के याचिकाकर्ता दीपक शुक्ला ‘तिरंगा महाराज’ द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए विस्तृत पत्र को PMO के डाक अनुभाग ने 30 मई 2026 को विधिवत मुहर लगाकर प्राप्त किया है। पत्र के साथ उच्च न्यायालय के आदेश, जिलाधिकारी का शपथ पत्र, सैटेलाइट रिपोर्ट और फोटोग्राफिक साक्ष्य संलग्न किए गए हैं।
माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ ने 15 मई 2026 के आदेश में नीलांश वाटर पार्क संचालकों द्वारा गोमती नदी पर किए गए अतिक्रमण को न्यायिक रूप से सिद्ध मानते हुए 7 जुलाई 2026 तक संपूर्ण अतिक्रमण हटाने के परमादेश पारित किए हैं। जिलाधिकारी लखनऊ ने भी अपने शपथ पत्र में स्वीकार किया है कि वाटर पार्क संचालकों ने सरकारी नदी की भूमि पर दिवाल बनाकर अवैध कब्जा किया है। रिमोट सेंसिंग बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक की सैटेलाइट रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट है कि नदी की प्राकृतिक धारा को पक्की दीवार बनाकर अवरुद्ध किया गया, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर क्षति पहुंची है।
याचिकाकर्ता ने PMO को भेजे पत्र में इसे राष्ट्रीय संपदा को क्षति पहुंचाने वाला जघन्य अपराध बताते हुए भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 152 के तहत भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कृत्य कहा है। इसके साथ ही BNS की धारा 111 संगठित अपराध, धारा 61 आपराधिक षड्यंत्र, उ.प्र. गैंगस्टर एक्ट, NSA, धन शोधन निवारण अधिनियम 2002, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई की मांग की गई है। पत्र में लोक सेवकों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है।
मुख्य अभियुक्तों के रूप में संतोष श्रीवास्तव, सतीश श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, मदनलाल एवं नीलांश वाटर पार्क के समस्त संचालकों का नाम दिया गया है। आरोप है कि इन्होंने 2007 से 2026 तक गोमती नदी पर अवैध कब्जा कर करोड़ों-अरबों की संपत्ति अर्जित की है। याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री से चार प्रमुख मांगें की हैं। पहली, नामजद अभियुक्तों पर तत्काल FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए। दूसरी, प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग वर्ष 2007 से 2026 तक अभियुक्तों व उनके परिजनों की समस्त चल-अचल व बेनामी संपत्ति चिन्हित कर कुर्क करे। तीसरी, स्थानीय स्तर पर 14 वर्षों की निष्क्रियता को देखते हुए CBI अथवा उच्च न्यायालय की निगरानी में गठित SIT से संपूर्ण प्रकरण की जांच कराई जाए। चौथी, राष्ट्रीय हरित अधिकरण में वाद दायर कर नदी को मूल स्वरूप में लाया जाए और क्षतिपूर्ति जब्त संपत्ति से वसूली जाए।
दीपक शुक्ला ‘तिरंगा महाराज’ का कहना है कि जब उच्च न्यायालय और जिलाधिकारी दोनों ने अतिक्रमण स्वीकार कर लिया है तो FIR दर्ज न होना न्यायिक आदेशों की अवहेलना है। उन्होंने कहा कि गोमती माँ स्वरूपा है और इस पर अवैध कब्जा देशद्रोह की श्रेणी में आता है। सत्य को दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जा सकता।
PMO में दस्तावेज पहुंचने के बाद दिल्ली से लखनऊ तक प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार नीलांश वाटर पार्क को सरकार द्वारा अधिग्रहित करने तथा CBI और ED की कार्रवाई के आदेश शीघ्र जारी हो सकते हैं। मामले में केंद्र के हस्तक्षेप के बाद बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
* दीपक शुक्ला ‘तिरंगा महाराज’
याचिकाकर्ता, PIL No. 10/2024
गोमती बचाओ जीवन बचाओ अभियान
ग्राम मरपा, थाना इटौंजा, तहसील बख्शी का तालाब, जिला लखनऊ
मो. 8853748648
