राजधानी दिल्ली में सीजीपी (CGP) प्रदर्शन के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने इस बार तकनीक का सहारा लिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जंतर-मंतर पर लगाए गए फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) कैमरों की मदद से अब तक 2,000 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और जो प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे।
इन लोगों के सत्यापन और गतिविधियों पर पुलिस की विशेष नजर है।
सूत्रों का कहना है कि जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए एफआरएस आधारित निगरानी लगातार की जा रही है।
कैमरों से प्राप्त तस्वीरों का मिलान पुलिस के उपलब्ध डाटाबेस से किया जा रहा है, ताकि किसी भी असामाजिक तत्व या वांछित व्यक्ति की तत्काल पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान औसतन करीब 10,000 लोग जंतर-मंतर और उसके आसपास मौजूद हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 3,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में 130 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि करीब 65 छात्रों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। घटनाओं के संबंध में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और वीडियो फुटेज, सीसीटीवी तथा एफआरएस से मिले इनपुट के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।
यदि किसी व्यक्ति की हिंसा, तोड़फोड़ या कानून-व्यवस्था भंग करने में संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली पुलिस का मानना है कि बड़ी भीड़ वाले आयोजनों में एफआरएस तकनीक न केवल संदिग्ध और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की तेजी से पहचान करने में मददगार साबित हो रही है, बल्कि इससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जांच को साक्ष्य आधारित बनाने में भी सहायता मिल रही है।
