श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक दिन पूर्व हुई बैठक में रामलला के चढ़ावे के धनराशि की गणना को लेकर भारतीय स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआई) के साथ ट्रस्ट के अनुबंध पर पुनर्विचार किया जा रहा है। ट्रस्ट ने सर्व सम्मति से यह जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि को सौंपी है। यह भी कहा गया कि वित्त समिति बैंक के साथ सम्बन्धों और मानक प्रक्रियाओं पर पुनर्विचार कर समुचित निर्णय ले। ट्रस्टियों ने एसओपी के अन्तर्गत बैंक के दायित्वों और उसके अनुपालन में बैंक की त्रुटियों पर समग्र रूप से चर्चा की । इसके साथ अनियमितताओं के प्रकाश में आने के बाद फैंकी प्रतिक्रिया और गंभीरता के अभाव को देखते हुए सभी ट्रस्टियों ने निराशा भी जताई।

बैठक में चढ़ावा चोरी की घटना पर ट्रस्टियों ने विचार करते हुए बैंक प्रबंधन पर ठीकरा फोड़ दिया लेकिन एसओपी के अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए जिम्मेदार ट्रस्ट के पक्ष को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। वह भी तब जबकि राम मंदिर में पुजारियों पर नजर रखने और उनके द्वारा किसी भी दर्शनार्थी को प्रसाद अथवा चरणामृत देने तक पर ट्रस्टियों ने प्रतिबंध ही नहीं लगाया बल्कि उन पर अंकुश के लिए नये नियम भी भितरिया व बाहरिया का बनाया गया और कड़ाई से इस व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित करने का जिम्मा सेना के अवकाश प्राप्त पूर्व सैनिक के रूप में तैनात धर्मगुरुओं को सौंपा गया। फिर भी रामलला के चढ़ावे की सुरक्षा के लिए हद दर्जे की बेफिक्री दिखाई गयी जो कि समझ से परे थी।

राम मंदिर ट्रस्ट के द्वारा रामलला को समर्पित की जाने वाली धनराशि के लिए एसबीआई सहित तीन बैंकों पंजाब नेशनल बैंक व बैंक आफ बड़ौदा को अधिकृत किया है। इन तीनों बैंकों के खाते में आनलाइन धनराशि अंतरण के लिए क्यूआर कोड भी ट्रस्ट की वेबसाइट से लेकर मंदिर परिसर में लगाए गए हैं।

ट्रस्ट ने इन तीनों बैंकों में एफडीआर के जरिए धनराशि जमा सुनिश्चित कराया है और चालू व बचत खाता दोनों ही खुलवाया है। फिर भी दानपात्रों से धनराशि की गणना का जिम्मा अकेले एसबीआई को सौंपा है। ट्रस्ट की बैठक में लिए गए निर्णय के मुताबिक वित्त समिति कमेटी बैंक प्रबंधन के द्वारा एसओपी के अनुपालन के प्रति जिस प्रकार की लापरवाही प्रदर्शित करने की समीक्षा के बाद अनुबंध को समाप्त भी कर सकती है अथवा दूसरे बैंकों को भी सहयोग में ले सकती है। हालांकि महंत गोविंद देव गिरि कह चुके हैं कि एसबीआई भी देश की प्रतिष्ठित बैंकिंग संस्थान है। इसलिए कोई निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा।

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