गाजियाबाद । थाना साहिबाबाद क्षेत्र में पत्रकार के साथ कथित पुलिस पिटाई और अवैध हिरासत के मामले में उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए गाजियाबाद पुलिस को विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं । आयोग ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए 7 मई 2026 तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं ।

मामला पत्रकार अभिषेक पंडित से जुड़ा है, जिन्होंने 23 मार्च 2025 को आयोग में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 19 मार्च 2025 की रात थाना साहिबाबाद पुलिस के सब-इंस्पेक्टर प्रभाकर सिंह और सब-इंस्पेक्टर सौरभ गौतम ने उन्हें चौकी शनि चौक के बाहर और अंदर घसीटते हुए बेरहमी से पीटा तथा बिना किसी वैध कारण के अवैध हिरासत में रखा।

मेडिकल के बाद भी हवालात में रखने का आरोप
शिकायत के अनुसार, 20 मार्च 2025 की रात करीब 12 बजे उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया, लेकिन इसके बाद भी उन्हें थाना साहिबाबाद की हवालात में बंद रखा गया। जबकि पुलिस रिकॉर्ड में यह दर्शाया गया कि 20 मार्च 2025 की दोपहर 12:30 बजे उन्हें आर्य समाज मंदिर, लाजपत नगर से गिरफ्तार किया गया था ।

आयोग द्वारा 18 अगस्त 2025 को पारित आदेश में सहायक पुलिस आयुक्त श्वेता यादव की रिपोर्ट और बयान का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया गया था कि मेडिकल परीक्षण के बाद भी पत्रकार को हवालात में ही रखा गया था । सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी द्वारा यह स्वीकार किया गया कि पत्रकार पहले से पुलिस हिरासत में था ।

आयोग ने उठाया महत्वपूर्ण सवाल
सुनवाई के दौरान आयोग की पीठ ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया कि 20 मार्च की रात से लेकर उसी दिन दोपहर 12:30 बजे तक पत्रकार कहां थे । इस पर पत्रकार ने आयोग को बताया कि वह पूरे समय हवालात में ही बंद रहे। आयोग के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखीय साक्ष्य और पुलिस की जीडी एंट्री भी इस तथ्य की पुष्टि करती बताई गई ।

जांच रिपोर्ट पर उठाई आपत्ति
दिनांक 10 मार्च 2026 को लखनऊ स्थित आयोग की पीठ में सुनवाई के दौरान पत्रकार अभिषेक पंडित ने ट्रांस हिंडन उपायुक्त निमिष पाटिल एवं अतुल कुमार सिंह सहायक पुलिस आयुक्त शालीमार गार्डन की जांच रिपोर्ट को फर्जी मनगढ़ंत बताते हुए गंभीर आपत्ति दर्ज कराई ।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा आयोग को कथित रूप से भ्रमित करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों को बचाने का प्रयास किया गया जा रहा है तथा एक मौलिक रूप से त्रुटिपूर्ण और मनगढ़ंत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई । पत्रकार ने यह भी मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी जैसे CBCID, CBI या न्यायिक मजिस्ट्रेट से कराई जाए ।

आयोग ने दिए विस्तृत जांच के आदेश
आयोग ने पत्रकार द्वारा प्रस्तुत आपत्तियों और बयानों का संज्ञान लेते हुए गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 7 मई 2026 तक जांच पूरी कर रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए । वही आयोग द्वारा सुनवाई की तारीख 8 मई निश्चित की गयी है ।

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