विजडम इंडिया संवाददाता।

नई दिल्ली, 19 मार्च

स्वामी वैद्यशाला, द्वारका, सेक्टर-7 में विश्व आयुर्वेद परिषद, दिल्ली प्रांत द्वारा नूतन संवत्सर 2083 बड़े उत्साह के साथ मनाया गया।सायं 3 बजे से 7 तक चले इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए इंचगिरी मठ के आचार्य स्वामी शिवानंद महाराज जी ने क्रियायोग के महत्व को बताया। आत्मज्ञान के लिए साधना के संदर्भ में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सुयोग्य आचार्य से सीखकर क्रियायोग का अभ्यास करना चाहिए।

अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित अंतर्राष्ट्रीय आयुर्वेद स्पीकर डा. अखिलेश शर्मा ने आयुर्वेद के वैश्विक स्वरूप का उल्लेख किया। विशिष्ट अतिथि, चौधरी ब्रह्म प्रकाश चरक आयुर्वेद संस्थान के प्रोफेसर वैद्य महेश कुमार ने हिंदू नववर्ष और नवरात्र के महत्व को स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से विवेचन किया।

डा. वैद्य योगेश कुमार पाण्डेय, कायचिकित्सा के प्रोफेसर, चौ. ब्र. चरक आयुर्वेद संस्थान ने सहभागियों के प्रश्नों का सटीक समाधान किया। विश्व हिंदू परिषद के विभाग मंत्री डा. सरोत्तम शर्मा ने हिंदू समाज के समक्ष उपस्थित समस्याओं पर कार्यकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। उन्होने हिंदुओं और हिंदू सनातन धर्म को बचाने संरक्षित करने पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए अंतरराष्ट्रीय व विश्व विभाग प्रमुख, विश्व आयुर्वेद परिषद वैद्य डा. स्वामीनाथ मिश्र ने आयुर्वेद पंचकर्म के उपयोगिता को शरीर संशोधन, चिकित्सा और रिजूविनेशन के लिए आवश्यक बताया। डा. वैद्य मिश्र ने अपने वैश्विक अनुभव के आधार पर आयुर्वेद को भविष्य के न केवल स्वास्थ्य विज्ञान अपितु आध्यात्मिक ज्ञान और सनातन शाश्वत धर्म भी बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्व आयुर्वेद परिषद, दिल्ली प्रांत के अध्यक्ष एवं दिल्ली स्थित प्रेमाधार आयुर्वेद संस्थान के संस्थापक डा. वैद्य नामाधार शर्मा ने विश्व आयुर्वेद परिषद स्थापना दिवस के संदर्भ में तथा संगठन का भी परिचय और भावी योजना की जानकारी दी तथा आगामी कार्यक्रमों में सहयोग करने और परिषद का सदस्य बनने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का प्रारंभ माननीय अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन तथा पं. अजय तिवारी द्वारा स्वस्ति वाचन के साथ प्रारंभ हुआ।

कार्यक्रम में उपस्थित कर्मा आयुर्वेद के उपाध्यक्ष वैद्य डॉ हिमांशु शेखर तिवारी जी, पंडित रमाकांत मिश्र, राजनाथ पाण्डेय, ज्ञानेश्वर वत्स, राजेश वत्स, जितेंद्र पांचाल, रंजीत असवाल, दिलीप मिश्र, अयोध्या से पधारे वैभव मिश्र, राम लखन दूबे, योगाचार्य अभिषेक जी, योगाचार्या सरस्वती जी, सामाजिक कार्यकर्ता दीपक सहगल, डा. महेन्द्र कुमार गेरा जी, डा. राजीव रंजन गौड़, ओंकार जी, अविनाश कामले (महाराष्ट से), रुपाली, कमला, शाश्वत जी, सीमा मिश्रा, रिंकू, नेहा, कमलेश यादव, सहित अनेक संभ्रांत नागरिक उपस्थित रहे।

सभा का संपूर्ण व्यय सहित अल्पाहार आदि का वहन स्वामी वैद्य शाला द्वारा सहर्ष किया गया। सभी माननीय अतिथियों को उत्तरीय वस्त्र, लक्ष्मीकमल का पौधा भेंट कर स्वामी वैद्य शाला द्वारा सम्मानित भी किया गया। सुप्रसिद्ध कलाकार एवं संगीत के आचार्य देवेश जी ने मनमोहक शिवस्त्रोत प्रस्तुत किया।

विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा मार्गों को भगवा ध्वज से सुसज्जित किया गया । कार्यक्रम का संयोजन डा. अवधेश पाण्डेय ने अपने सहकर्मियों, वैद्य शीशपाल, निरूपा तथा जितेंद्र के सहयोग से किया।

वैद्य शाला की मुख्य संचालिका डा. शिवानी मिश्र पाण्डेय ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

सामूहिक विश्व कल्याण मंत्र के साथ समारोह संपन्न हुआ।

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