देश की राजनीति में कभी सबसे ताकतवर पार्टी रही और सबसे ज्यादा सत्ता पर काबिज रह चुकी कांग्रेस पार्टी इस वक्त भारी अंतर्कलह और बिखराव से जूझ रही है। पार्टी न तो स्थायी अध्यक्ष पद पर किसी नाम पर फैसला ले पा रही है और न ही पार्टी के पुराने वफादार नेताओं को जाने से रोक पा रही है। ऐसे में 2024 लोकसभा चुनाव भी नजदीक है। इस आपाधापी और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी के नेतृ्तव में भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत कर दी है। पांच महीनों तक की इस यात्रा में कांग्रेस नेता 12 राज्यों का भ्रमण करते हुए कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा करेंगे। कांग्रेस की इस यात्रा का मकसद सिर्फ भाजपा को चुनौती देना नहीं खुद का अस्तित्व बचाना भी है। इस यात्रा से क्या कांग्रेस जोड़ो मकसद पूरा हो पाएगा? पार्टी के असंतुष्ट खेमे की नाराजगी दूर हो पाएगी? इसके अलावा विपक्षी दलों में खुद को साबित करने की चुनौती भी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज तमिलनाडु के कन्याकुमारी में श्रीपेरुंबदूर इलाके से भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की। यह स्थान पार्टी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी स्थान पर देश के पूर्व पीएम और राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी की हत्या हुई थी। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने इस यात्रा को दूसरा स्वतंत्रता संग्राम करार दिया है। पार्टी चीफ सोनिया गांधी ने भी इस यात्रा को ऐतिहासिक बताया और उम्मीद जताई कि 3,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा पार्टी को फिर से जीवंत करने में मदद करेगी। कांग्रेस की यह यात्रा करीब 150 दिन तक चलेगी और 12 राज्यों का भ्रमण करते हुए कश्मीर पर समाप्त होगी। इस दौरान राहुल गांधी समेत कांग्रेसी नेता पैदल ही इस यात्रा को पूरा करेंगे।

2022-09-07 16:22:12
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