सीतापुर
गोमती नदी पर हो रहे अवैध कब्जे के खिलाफ वर्षों से संघर्ष कर रहे क्रांतिकारी दीपक शुक्ला “तिरंगा महाराज” को अब राष्ट्रीय हिंदू शेर सेना का खुला समर्थन मिल गया है। शुक्रवार को सीतापुर स्थित संगठन के राष्ट्रीय कार्यालय में तिरंगा महाराज ने राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास चतुर्वेदी “हिंदू” से मुलाकात की और जरूरी दस्तावेज साक्ष्य उपलब्ध कराए

क्या है पूरा मामला
दीपक शुक्ला तिरंगा महाराज का आरोप है कि नीलांश वाटर पार्क द्वारा गोमती नदी के बीच अवैध दीवार खड़ी कर नदी की प्राकृतिक धारा को मोड़ दिया गया है और सैकड़ों बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। इस कब्जे में भू-माफिया संतोष श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, मदन लाल एवं सतीश श्रीवास्तव का नाम सामने आया है।

सरकारी रिपोर्ट में भी कब्जे की पुष्टि
राजस्व विभाग के लोकसेवक की जांच रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से गोमती नदी पर अवैध कब्जा पाया गया है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि नदी की जमीन पर पक्का निर्माण कर धारा को बाधित किया गया है। इसके बावजूद अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है।

हिंदू शेर सेना अध्यक्ष का बयान
मुलाकात के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास चतुर्वेदी “हिंदू” ने कहा — “मां गोमती सिर्फ एक नदी नहीं, सनातन संस्कृति की जीवनरेखा है। तिरंगा महाराज अकेले लड़ रहे थे, अब यह लड़ाई पूरे हिंदू समाज की है। राष्ट्रीय हिंदू शेर सेना तन-मन-धन से तिरंगा महाराज के साथ है। हम गोमती को कब्जा मुक्त कराकर रहेंगे। प्रशासन 15 दिन में कार्रवाई करे, वरना संगठन सड़क पर उतरेगा। भू-माफिया कान खोलकर सुन लें — अब गोमती के एक-एक इंच पर हिसाब होगा।”

झूठे मुकदमे-जेल के बाद भी नहीं रुके तिरंगा महाराज
दीपक शुक्ला “तिरंगा महाराज” पिछले कई वर्षों से गोमती संरक्षण की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस दौरान उन पर दर्जनों झूठे मुकदमे दर्ज किए गए, जानलेवा हमला हुआ और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। लेकिन उन्होंने संघर्ष नहीं छोड़ा।

क्यों जरूरी है गोमती को बचाना: इतिहास और महत्व

आदि गंगा के नाम से प्रसिद्ध गोमती नदी का वर्णन स्कंद पुराण में मिलता है। मान्यता है कि इसमें स्नान करने से गंगा स्नान के बराबर पुण्य मिलता है। महर्षि वशिष्ठ ने इसके तट पर तपस्या की थी। नैमिषारण्य जैसा तीर्थ इसी के किनारे बसा है। लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, सुल्तानपुर, जौनपुर समेत 15 जिलों के 3 करोड़ लोगों की प्यास इसी से बुझती है। यह सिर्फ नदी नहीं, अवध की सांस्कृतिक पहचान है।

दीवार से हो रही है गोमती की हत्या: 5 बड़े खतरे

1. जैव विविधता खत्म: दीवार से नदी का बहाव रुकने से पानी में ऑक्सीजन कम हो गई है। नदी के तत्वों को खतरा उत्पन्न हो गया है
2. मछली, कछुए और लुप्त हो रहे हैं। वेटलैंड सूखने से प्रवासी पक्षियों ने आना बंद कर दिया।
2. बाढ़ का बढ़ता खतरा: दीवार के कारण बरसात में दोनों तरफ पानी निकास नहीं हो पाएगा। जिससे एक तरफ के किसान प्रभावित हो रहे हैं भयानक बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
3. भूजल संकट: नदी का पानी जमीन में रिचार्ज नहीं हो रहा। हैंडपंप और ट्यूबवेल सूख रहे हैं, किसानों की खेती चौपट हो रही है।
4. मानवता पर खतरा: नदी में दीवाल बनाने से और प्रदूषित पानी गंदा पानी कैंसर, हैजा, चर्म रोग जैसी बीमारियों को जन्म दे रहा है। आने वाली पीढ़ी को हम जहरीला पानी विरासत में देंगे।
5. पर्यावरण को भारी नुकसान: तटों पर कब्जे से नदी का पूरा इकोसिस्टम ध्वस्त हो गया है। एक अवैध दीवार ने पूरी सभ्यता को संकट में डाल दिया है।

अब लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है। हिंदू शेर सेना के समर्थन के बाद भू-माफियाओं पर प्रशासनिक शिकंजा कसने की उम्मीद बढ़ गई है। तिरंगा महाराज ने कहा, “अंतिम विजय सत्य और मां गोमती की होगी।”

रिपोर्ट: विशेष संवाददाता

 

दीपक शुक्ला “तिरंगा महाराज” – का संपर्क सूत्र
8853748648

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