देने का फैसला किया है। यह मस्जिद पूर्वी यरूशलम में स्थित है और मुसलमानों के लिए तीसरा सबसे पवित्र स्थल मानी जाती है, जबकि यहूदी समुदाय इस पूरे परिसर को टेंपल माउंट के रूप में देखता है। मिडिल ईस्ट में बुधवार से रमजान की शुरुआत हो चुकी है, ऐसे में रमजान से पहले लिया गया यह फैसला खास माना जा रहा है। हालांकि इस अनुमति के साथ इजरायल ने कुछ शर्तें भी तय की हैं।
इजरायली अधिकारियों के अनुसार अल-अक्सा मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति केवल उन्हीं पुरुषों को दी जाएगी, जिनकी उम्र 55 वर्ष से अधिक है। महिलाओं के लिए यह आयु सीमा 50 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि बच्चों के लिए अधिकतम उम्र 12 साल रखी गई है। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जुमे की नमाज के लिए टेंपल माउंट परिसर में कुल 10 हजार लोगों को ही आने की इजाजत होगी। इसके लिए पहले से दैनिक परमिट लेना अनिवार्य होगा और बिना परमिट किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
सेना ने स्पष्ट किया है कि 12 वर्ष तक के बच्चे तभी मस्जिद आ सकेंगे, जब वे अपने फर्स्ट डिग्री रिश्तेदार—जैसे माता-पिता, भाई या बहन—के साथ होंगे। गौरतलब है कि 1967 से अल-अक्सा मस्जिद और उसके आसपास का इलाका इजरायल के नियंत्रण में है और प्रशासनिक व्यवस्था भी वहीं से संचालित होती है, हालांकि मस्जिद का प्रबंधन जॉर्डन के वक्फ बोर्ड के पास है।
इस बीच फिलिस्तीनी पक्ष ने आरोप लगाया है कि इजरायल अल-अक्सा मस्जिद में रमजान की तैयारियों में बाधा डाल रहा है। वक्फ बोर्ड की ओर से मस्जिद के बाहर टेंट लगाने और मेडिकल क्लीनिक खोलने की तैयारी की जा रही थी, जिसे रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा अल-अक्सा मस्जिद के वरिष्ठ इमाम शेख मुहम्मद अल-अब्बासी ने दावा किया कि उन्हें भी मस्जिद में प्रवेश करने से रोका गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक सप्ताह के लिए अल-अक्सा मस्जिद में आने पर प्रतिबंध लगाया गया है और इस आदेश को आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
