उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2017 से राज्य में सहकारी और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार के स्पष्ट इरादे ने जमीनी स्तर पर स्पष्ट परिणाम दिए हैं। मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय विकास एवं रोजगार के अवसरों की कमी थी और सहकारी क्षेत्र अस्त-व्यस्त था।

उन्होंने कहा, ”2017 से पहले, न तो विकास था और न ही रोजगार। सहकारी क्षेत्र पर ऐसे लोग काबिज थे जो माफिया से कम नहीं थे।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 16 जिला सहकारी बैंकों को चूककर्ता (डिफॉल्टर) घोषित किया था। उन्होंने कहा, ”आज, इन 16 जिला सहकारी बैंकों में से 15 मुनाफे में आ गए हैं। बचे हुए एक को भी मुनाफे में लाने की कोशिश जारी है।”

लखनऊ में आयोजित आयोजित ‘स्टेट क्रेडिट सेमिनार’ में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पूरे उत्तर प्रदेश में प्राथमिक कृषि ऋण समिति (पैक्स) को मजबूत किया है। इस मौके पर ‘स्टेट फोकस पेपर 2026-27’ भी जारी किया गया।

योगी ने कहा, ”उत्तर प्रदेश में पैक्स की संख्या बहुत अधिक है। हमने उनका ‘टर्नओवर’ बढ़ाया है, उनकी ऋण सीमा बढ़ाई है और उन्हें खाद वितरण के काम में शामिल किया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारी विभाग में कर्मचारियों की कमी के बावजूद उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे अच्छे खाद वितरण प्रणालियों में से एक हासिल किया है। उन्होंने कहा, ”कृषि और सहकारिता विभागों के बीच तालमेल से सहकारी समितियां एक बार फिर नए जन आंदोलन के रूप में उभरी हैं।”

एमएसएमई क्षेत्र में सुधारों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पहले जो स्थिति थी उसने राज्य से बड़े पैमाने पर पलायन को मजबूर किया था। उन्होंने कहा, ” कारीगर निराश थे और एमएसएमई क्षेत्र ढहने की कगार पर था। सरकार ने प्रोत्साहन दिया और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल के जरिये इसे बढ़ावा दिया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब देश का पहला राज्य है जो अपने एमएसएमई क्षेत्र को पांच लाख रुपये तक का बीमा ‘कवर’ दे रहा है। उन्होंने कहा, ” जब सरकार की नीयत साफ होती है, तो नतीजे भी साफ दिखते हैं।”

 

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