तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले से पशु क्रूरता की एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिले के थिम्माइपल्ली गांव में करीब 100 आवारा कुत्तों को कथित तौर पर जहर का इंजेक्शन लगाकर मार देने का मामला उजागर हुआ है। इस घटना से पशु प्रेमियों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

यह मामला तब सामने आया जब ‘स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ (NGO) से जुड़ी क्रूरता निवारण सहायक मुदावत प्रीति ने इस सामूहिक हत्या के खिलाफ चरापाका पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने 27 जनवरी को इस मामले में FIR दर्ज की है।

10 दिनों में कथित रूप से दी गई मौत

शिकायत के अनुसार, मुदावत प्रीति को सूचना मिली थी कि पिछले 10 दिनों के भीतर गांव में लगभग 100 आवारा कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन देकर मार दिया गया। आरोप है कि यह कार्रवाई गांव के सरपंच और पंचायत सचिव के निर्देश पर कराई गई।

रिकॉर्डेड बातचीत बनी सबूत का आधार

मामले से जुड़ी एक कथित रिकॉर्डेड बातचीत भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह बातचीत पशु कल्याण कार्यकर्ता अडुकापुरम गौतम और गांव के सरपंच के बीच हुई थी। इसमें सरपंच द्वारा कथित तौर पर यह स्वीकार किया गया कि कुत्तों को इंजेक्शन देकर मारा गया और इस काम के लिए 18,000 रुपये में लोगों को लगाया गया।

शवों को हटाने का भी आरोप

शिकायत में यह भी जिक्र है कि ग्राम पंचायत के कर्मचारी रवि पर कुत्तों के शव हटाने का आरोप लगाया गया है। वहीं एक अन्य बातचीत में कथित रूप से ठेके पर बुलाए गए व्यक्ति गोपी ने कहा कि कई दिनों से कुत्तों को जहर दिया जा रहा था। सरपंच के हवाले से यह भी बताया गया कि मृत कुत्तों के शव गांव से करीब दो किलोमीटर दूर फेंके गए।

सख्त कार्रवाई की मांग

शिकायतकर्ता ने इन आरोपों के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पशु अधिकार कार्यकर्ता अडुकापुरम गौतम ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की अमानवीयता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए पशु संरक्षण कानूनों का सख्ती से पालन जरूरी है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है। यह घटना एक बार फिर आवारा जानवरों की सुरक्षा और स्थानीय प्रशासन की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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