अग्निपथ योजना एक बार फिर से सुर्खियों में छा गई है. इस बार इसके पीछे की वजह नेपाल है. दरअसल, नेपाल ने भारत से कहा है कि अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में गोरखाओं की भर्ती को रोक दिया जाए.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित ‘गोरखा रिक्रूटमेंट डिपो’ को नेपाल के बुटवल में 25 अगस्त से सात सितंबर तक अग्निवीरों की भर्ती करने वाला था. लेकिन अग्निपथ योजना पर नेपाल की चुप्पी और फिर नेपाल का भर्ती रोकने के लिए कहने की वजह से भर्ती रैली का आयोजन नहीं हो पाया. गोरखा रिक्रूटमेंट डिपो के पास सेना के लिए गोरखा सैनिकों की भर्ती का जिम्मा है.

वहीं, नेपाली मीडिया में खबर आई कि नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खडके ने भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात कर अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं की भर्ती रोकने को कहा. विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल भारतीय सेना में गोरखाओं को भर्ती किए जाने पर सकारात्मक रुख रखता है. लेकिन भारत सरकार की नई सैन्य भर्ती योजना पर देश के प्रमुख राजनीतिक दलों से बात की जाएगी. इसके बाद फैसला किया जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन हैं गोरखा, क्या है इनका इतिहास और कैसे भारतीय सेना में इनकी भर्ती की जाती है?

भारत-नेपाल के सैन्य रिश्तों की शुरुआत कैसे हुई?

महाराजा रणजीत सिंह के शासन के दौर में लाहौर में सेना में नेपाल के कुछ सैनिक थे. इन सैनिकों को लाहुरे या ‘भाग्य के सैनिक’ कहा जाता था. ब्रिटिश राज के दौरान भारत में गोरखा रेजिमेंट की पहली बटालियन की स्थापना 24 अप्रैल 1815 को की गई. इसे ‘नासिरी रेजिमेंट’ कहा जाता था. जब प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई, तो ब्रिटिश भारतीय सेना के पास 10 गोरखा रेजिमेंट थीं. 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, ब्रिटेन-भारत-नेपाल के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ. इसके तहत रेजिमेंटों को ब्रिटिश और भारतीय सेना के बीच एक समान रूप से बांट दिया गया.

तीनों देशों के बीच ये त्रिपक्षीय समझौता नवंबर 1947 में. समझौते के तहत 6 गोरखा रेजिमेंट भारत को मिली और 7वीं और 10वीं गोरखा रेजिमेंट के सैनिकों को समायोजित कनरे के लिए भारत सरकार द्वारा एक और रेजिमेंट का गठन किया गया. दरअसल, इन सैनिकों ने ब्रिटिश सेना में शामिल नहीं होने का फैसला किया. इस तरह नेपाल के लोगों की भारतीय सेना में एंट्री हुई.

क्या नेपाल के नागरिक भारतीय सेना में शामिल हो सकते हैं?

कोई भी नेपाली नागरिक भारतीय सेना में जवान और अधिकारी के तौर पर शामिल हो सकता है. नेपाल के नागरिक राष्ट्रीय रक्षा अकादमी या संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा दे सकते हैं और एक अधिकारी के रूप में भारतीय सेना में शामिल हो सकते हैं. नेपाली सेना भारतीय मिलिट्री अकेडमी और कॉम्बेट कॉलेजों में ट्रेनिंग के लिए अपने अधिकारियों को भेजती रहती है. भारतीय सेना के गोरखा रेजिमेंट में 43 बटालियन हैं, जिनमें भारत के सैनिकों के अलावा नेपाल से भर्ती किए गए सैनिक भी शामिल हैं. नेपाल के गोरखाओं की भर्ती पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और गोरखपुर के गोरखा रिक्रूटमेंट डिपो द्वारा की जाती है.

2022-08-26 17:10:25
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