अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नए शांति प्रस्ताव को अस्वीकार करने के संकेत देने के बाद ईरान ने कहा है कि अब अगला कदम पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर करता है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने तेहरान में विदेशी राजनयिकों से बातचीत में कहा कि कूटनीति का रास्ता अपनाना है या टकरावपूर्ण रुख जारी रखना है, यह फैसला अब अमेरिका को करना है। ईरान दोनों विकल्पों के लिए पूरी तरह तैयार है।
दरअसल, ट्रंप ने शनिवार को एयर फोर्स वन में सवार होने से पहले पत्रकारों से कहा कि वह तेहरान के प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे, लेकिन इसके सफल होने की संभावना पर उन्होंने संदेह जताया। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है। उन्होंने आगे कहा कि मैं आपको इसके बारे में बाद में बताऊंगा। कुछ देर बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वे इस प्रस्ताव को स्वीकार्य मानने की कल्पना भी नहीं कर सकते, क्योंकि ईरान ने पिछले 47 वर्षों में मानवता और दुनिया के साथ जो किया है, उसके लिए अभी तक पर्याप्त सजा नहीं भुगती है।
ईरान के दो अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसियों तसनीम और फ़ार्स ने रिपोर्ट किया कि तेहरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को 14 सूत्रीय नया शांति प्रस्ताव भेजा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल के बीच फरवरी के अंत में शुरू हुए युद्धविराम के बाद 8 अप्रैल से अस्थायी युद्धविराम लागू है। वाशिंगटन ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने वाला ठोस समझौता हुए बिना युद्ध समाप्त नहीं किया जाएगा। ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण है।
फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर वे दुर्व्यवहार करते हैं या कुछ गलत करते हैं, तो हम देखेंगे। यह निश्चित रूप से एक विकल्प है। इस बीच, अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को चेतावनी जारी की है कि होर्मुज से सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए ईरान को किसी भी रूप में भुगतान करने पर उन्हें गंभीर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इस चेतावनी में नकद भुगतान के साथ-साथ डिजिटल संपत्तियां, ऑफसेट, अनौपचारिक अदला-बदली और यहां तक कि धर्मार्थ दान भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखा है, जिससे वैश्विक तेल, गैस और उर्वरक आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी लगा दी है, जिससे तेहरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इस गतिरोध के चलते तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर से करीब 50 प्रतिशत बढ़ गई हैं।
