नई दिल्ली | जनवरी 2026
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने सूखा प्रभावित और बारिश पर निर्भर इलाकों के लिए बाजरे की एक नई और खास किस्म विकसित की है। इस किस्म का नाम आरएचबी 273 है। यह दुनिया की पहली तीन-स्तरीय संकर (थ्री-वे हाइब्रिड) बाजरा किस्म है।
यह किस्म विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए तैयार की गई है, जहाँ पानी की कमी रहती है और खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर होती है।
आरएचबी 273 को देश के विभिन्न हिस्सों में वर्ष 2022 से 2024 के बीच 30 स्थानों पर परखा गया। परीक्षण के दौरान यह किस्म सभी जगह बेहतर साबित हुई। इसकी औसत पैदावार लगभग 2239 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मौजूदा किस्मों की तुलना में 13 से 27 प्रतिशत तक अधिक है। इसके साथ ही इससे चारे की भी अच्छी पैदावार मिलती है, जिससे यह किसानों के लिए दोहरा लाभ देने वाली किस्म बन जाती है।

इस बाजरा किस्म में प्रमुख बीमारियों—जैसे मिल्ड्यू, ब्लास्ट और स्मट आदि के खिलाफ अच्छी प्रतिरोधक क्षमता पाई गई है। पोषण के लिहाज़ से भी यह किस्म काफी समृद्ध है। इसमें आयरन, जिंक, प्रोटीन और फैट की अच्छी मात्रा पाई गई है, जो पोषण सुरक्षा को मजबूती प्रदान करती है।
आईसीएआर की बाजरा परियोजना की 60वीं वार्षिक बैठक (मई 2025) में इस किस्म को जारी करने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद 31 दिसंबर 2025 को केंद्र सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया। फिलहाल इसे राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में खेती के लिए मंजूरी दी गई है।
वैज्ञानिकों का साझा प्रयास
इस किस्म के विकास में आईसीएआर, आरएआरआई दुर्गापुरा (जयपुर), आईसीआरआईसैट, हैदराबाद और जोधपुर स्थित परियोजना इकाई के वैज्ञानिकों ने मिलकर काम किया। कई वरिष्ठ और युवा वैज्ञानिकों के निरंतर शोध और परीक्षण के बाद यह किस्म विकसित की जा सकी।
किसानों के लिए फायदेमंद
कम समय में तैयार होने वाली, सूखा सहने वाली, अधिक पैदावार देने वाली और पोषण से भरपूर यह किस्म सूखे और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। यह दर्शाता है कि किस तरह देश में किया जा रहा कृषि अनुसंधान सीधे किसानों तक लाभ पहुँचा रहा है और बदलती जलवायु की चुनौतियों से निपटने में मदद कर रहा है।
क्या कहते हैं आईसीएआर के प्रमुख?
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट कहते हैं कि पोषण सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिहाज़ से बाजरा भारत की एक अत्यंत महत्वपूर्ण फसल है। वर्ष 2023 में इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट्स और G20 के दौरान माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और दुनिया में बाजरे को लेकर विशेष फोकस बढ़ाया गया। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए भारत ने दुनिया की पहली थ्री-वे क्रॉस बाजरा किस्म जारी की है। यह नई किस्म सूखा-प्रभावित और वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों के किसानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी और बाजरे को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय अभियान को और गति देगी।
