यूपी की योगी सरकार ने शहरों में विकास कार्य तेजी से कराने के लिए अटल मिशन फॉर रिजूवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफारमेशन (अमृत-2) में निकायों की देय अंश राशि घटा दी है। निकायों की अंश राशि को घटाकर क्रमश: आठ, चार व दो प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले के चलते निकायों के पास अब विकास के लिए ज्यादा धनराशि उपलब्ध हो सकेगी।

इसी के साथ अमृत-एक की बची हुई 21 परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए निकायों की 89.81 करोड़ रुपये देय अंश राशि को राज्य वित्त अयोग से देने का फैसला किया गया है। इससे पौराणिक व धार्मिक स्थलों पर बचे हुए कामों को तेजी से पूरा कराने का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला हुआ। नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार ने अमृत में काम कराने के लिए केंद्र, राज्य व निकायों की अंश राशि तय कर रखी है। प्रदेश के अधिकतर निकायों की माली हालत खराब है। इसलिए वे अपना हिस्सा नहीं दे पाते हैं, जिसके चलते विकास कार्य में बाधा आ रही है। इसीलिए निकायों की हिस्सेदारी कम करने का फैसला किया गया है।

10 लाख से अधिक आबादी वाले निकायों के लिए केंद्र 25, राज्य सरकार 60 और निकाय की देय अंश राशि 15 प्रतिशत थी। इसे घटाकर क्रमश: 25, 67 और 8% कर दिया गया है। 10 लाख से कम आबादी वाले निकायों में निकाय अंश राशि 10% से कम कर 4% कर दिया गया है। एक लाख से कम आबादी वाले निकायों में निकाय अंश राशि 10% से कम कर 2% कर दिया गया है।

केंद्र सरकार ने अमृत-एक योजना बंद कर दी है। इस योजना में 60 निकायों में कुल 328 परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं। इनमें से 307 पूरी हो चुकी हैं और 21 अभी चल रही हैं। इसे पूरा कराने के लिए निकायों को 89.81 करोड़ निकाय अंश राशि देनी है, लेकिन उनकी माली हालत ठीक न होने की वजह से नहीं दे पा रही थीं। इसीलिए इस पैसे को राज्य वित्त आयोग से देने का फैसला किया गया है।

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