
विभाजन की विभीषिका को स्मरण करते हुए राष्ट्रीय एकता, अखंडता, शांति एवं सामाजिक समरसता का लिया सामूहिक संकल्प
देहरादून, 15 अगस्त 2026। रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, कोटड़ा संतूर परिसर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुभारती परंपरा के अनुरूप “सत्ता हस्तांतरण एवं प्रार्थना दिवस” का आयोजन श्रद्धा, गरिमा एवं राष्ट्रभावना के साथ किया गया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता के ऐतिहासिक महत्व को स्मरण करने के साथ-साथ 14 अगस्त को मनाए जाने वाले “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” (Partition Horrors Remembrance Day) की भावना के अनुरूप विभाजन की त्रासदी में अपने प्राण गंवाने वाले असंख्य लोगों तथा विस्थापित परिवारों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश राष्ट्रीय एकता, अखंडता, शांति, सामाजिक सद्भाव एवं समरसता को सुदृढ़ करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 9:30 बजे विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. देश दीपक द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर किया गया। ध्वजारोहण के तुरंत पश्चात राष्ट्रभावना एवं देशभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण में राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” प्रस्तुत किया गया, जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड रही। इसके उपरांत राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया, जिसकी अवधि 52 सेकंड रही। राष्ट्रगान के पश्चात उपस्थित सभी लोगों ने विभाजन की त्रासदी में अपने प्राणों की आहुति देने वाले असंख्य लोगों तथा विभाजन से प्रभावित परिवारों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी एवं वैश्विक संबंध विभाग के सहायक निदेशक श्री रमन कृष्ण किमोठी ने “सत्ता हस्तांतरण एवं प्रार्थना दिवस” की ऐतिहासिक एवं वैचारिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए वर्ष 1947 के विभाजन की पीड़ा, उसके व्यापक मानवीय प्रभाव तथा विस्थापन एवं सामाजिक विघटन की त्रासदी को स्मरण किया। उन्होंने राष्ट्रीय एकता, अखंडता, शांति एवं सामाजिक सद्भाव के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” के माध्यम से विभाजन की पीड़ा को स्मरण करना और आने वाली पीढ़ियों को इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय से परिचित कराना आवश्यक है।
इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने “प्रार्थना एवं संकल्प” के माध्यम से राष्ट्र की एकता, अखंडता, शांति, सद्भाव एवं सामाजिक समरसता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। साथ ही भारत की सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ़ करते हुए “अखंड भारत” के आदर्श को भी स्मरण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। “ऐ मेरे वतन के लोगों” देशभक्ति गीत की प्रस्तुति विद्यार्थियों एवं संबद्ध एवं स्वास्थ्य विज्ञान संकाय के सहयोग से की गई, जिसका समन्वय सुश्री कविता नैनवाल ने किया। इस प्रस्तुति ने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों तथा राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीरों की स्मृति को भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रदान की।
इसके पश्चात प्रदर्शन कला विभाग के शिक्षक श्री शाहरुख ने “मैं किस मिट्टी का हूँ” देशभक्ति गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। दोनों सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों में राष्ट्रप्रेम एवं देशभक्ति की भावना को और अधिक सशक्त किया।

कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. देश दीपक ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान को नमन किया। उन्होंने विभाजन की विभीषिका के दौरान प्रभावित हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इतिहास की पीड़ादायक घटनाओं को स्मरण करने का उद्देश्य समाज में वैमनस्य उत्पन्न करना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर शांति, सद्भाव, राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करना है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनसमुदाय से राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति निरंतर जिम्मेदारी का भाव है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष तथा विभाजन की पीड़ा को समझते हुए ऐसे सशक्त एवं समरस भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया, जहां शांति, भाईचारा और राष्ट्रीय एकता सर्वोपरि हो।
इस अवसर पर ट्रस्टी एवं सहायक निदेशक, अकादमिक, श्रीमती अवनि कमल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि उन महान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, समर्पण और बलिदान को स्मरण करने का पावन अवसर है, जिनके संघर्ष से हमें स्वतंत्रता प्राप्त हुई। उनके प्रेरणादायी संदेश ने छात्रों को अमर क्रांतिकारियों की गौरवगाथा और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की स्मृतियों से भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रतिभा जुयाल, विज्ञान संकाय तथा सुश्री रिनी लोहानी, कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग द्वारा किया गया। दोनों ने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों का सुचारु, अनुशासित एवं गरिमापूर्ण संचालन किया।
इस अवसर पर कुलसचिव श्री खालिद हसन, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. रवीन्द्र प्रताप सिंह, शैक्षणिक अधिष्ठाता एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. मनमोहन गुप्ता, संस्कृति विभाग के सचिव एवं कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग के विभागाध्यक्ष श्री विनय सेमवाल, विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता एवं अनुसंधान निदेशक डॉ. संदीप ध्यानी, कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. इमरान खान, पैरामेडिकल संकाय के अधिष्ठाता डॉ. अनिर्बाण पात्रा, अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी एवं वैश्विक संबंध विभाग के सहायक निदेशक श्री रमन कृष्ण किमोठी, डॉ. प्रतिभा जुयाल, डॉ. पुष्पा ध्यानी, प्रो. नितिका कौशल, राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) के समन्वयक श्री प्रदीप महारा, शुभम, आदित्य, रजत, शरद, राजदीप राणा, विवेक चौहान, सूरज, रवि कांत, बागवानी कर्मचारीगण एवं कुमारी सपना सहित संस्कृति विभाग के सदस्य, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
सुभारती परंपरा के अनुरूप आयोजित “सत्ता हस्तांतरण एवं प्रार्थना दिवस” का उद्देश्य स्वतंत्रता के ऐतिहासिक महत्व को स्मरण करने के साथ-साथ 14 अगस्त के “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” की भावना के अनुरूप विभाजन की पीड़ा एवं उसके मानवीय प्रभावों को याद करना, शांति एवं सद्भाव का संदेश देना तथा राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं सामाजिक समरसता के प्रति सामूहिक संकल्प को सुदृढ़ करना रहा।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि इतिहास का स्मरण राष्ट्र को विभाजित करने के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एकता, शांति, मानवता और राष्ट्रहित के प्रति अधिक सजग बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने स्वतंत्रता सेनानियों, विभाजन की त्रासदी के पीड़ितों तथा राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए समर्पित सभी ज्ञात-अज्ञात वीरों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
