दरअसल, बीते करीब डेढ़ दशक से बसपा का सियासी सफर संकट भरा रहा है। वर्ष 2019 में बसपा के 10 प्रत्याशी लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने थे हालांकि तब बसपा ने सपा के साथ गठबंधन किया था। इसके बाद वर्ष 2022 के चुनाव में बसपा के उमाशंकर सिंह बलिया की रसड़ा सीट से जीत हासिल कर पाए थे। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुला था। चुनाव दर चुनाव बसपा का वोट प्रतिशत भी घटने से पार्टी को दोहरे संकट का सामना करना पड़ रहा है।