मयूर रिजॉर्ट्स में जुटे सहपाठियों ने साझा की जीवन-यात्रा, याद किए स्कूल के दिन; गीत, ठिठोली और पुरानी यादों से सजा यादगार आयोजन

अंबेडकर नगर, 20 सितंबर 2026

आदर्श जनता इंटर कॉलेज, टांडा, अंबेडकर नगर के 1989 हाई स्कूल बैच के विद्यार्थियों के लिए 20 सितंबर 2026 का दिन अविस्मरणीय बन गया। विद्यालय से बिछड़ने के 37 वर्ष बाद इस बैच के पूर्व छात्र मयूर रिजॉर्ट्स, अंबेडकर नगर में एकत्र हुए तो चार दशक के करीब का अंतराल कुछ घंटों में सिमट गया। जीवन की अलग-अलग राहों पर आगे बढ़ चुके ये सहपाठी फिर उसी दौर में लौट आए, जहां उनकी दोस्ती, शरारतें और सपने आकार लेते थे।

यह मिलन समारोह केवल एक औपचारिक पुनर्मिलन नहीं, बल्कि साझे बचपन और पुरानी दोस्ती का उत्सव बन गया। कभी एक ही कक्षा में साथ पढ़ने वाले इन विद्यार्थियों ने आज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। कोई प्रशासनिक सेवा में महत्वपूर्ण दायित्वों तक पहुंचा, कोई डॉक्टर या इंजीनियर बना, कोई प्रतिष्ठित अधिवक्ता है, कोई शिक्षण के क्षेत्र में योगदान दे रहा है, जबकि कुछ ने मैनेजमेंट और पत्रकारिता में उल्लेखनीय पहचान बनाई है।

मगर इस अवसर पर इन उपलब्धियों की औपचारिकता पीछे छूट गई। सभी के बीच वही आत्मीयता थी, जो स्कूल के दिनों में हुआ करती थी। मुलाकात होते ही पुराने संबोधन, मजाक और किस्से लौट आए। कक्षा की शरारतें, दोस्तों की नटखट हरकतें, मास्टर साहब की डांट और पिटाई तथा उन दिनों की छोटी-छोटी घटनाएं फिर चर्चा का विषय बन गईं। जिन बातों को कभी सामान्य समझकर भुला दिया गया था, वही 37 वर्ष बाद सबसे प्यारी यादें बनकर सामने आईं।

कार्यक्रम का माहौल यादों तक सीमित नहीं रहा। अपने दौर के लोकप्रिय गीतों पर सहपाठियों ने जमकर नृत्य किया और नए दौर के गीतों पर भी पूरे उत्साह से थिरके। हंसी-मजाक और चुहल के बीच कई बार ऐसा लगा जैसे समय ने उम्र का हिसाब ही मिटा दिया हो।
सहपाठियों ने एक-दूसरे को प्रेमपूर्वक यादगार प्रतीक चिन्ह एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया। दिनभर फोटो खिंचवाने का सिलसिला चलता रहा। कभी पूरी टोली साथ दिखाई दी, कभी पुराने मित्रों के छोटे समूह बने और कभी वर्षों बाद मिले दोस्त गले मिलकर तस्वीर में अपनी मुलाकात को संजोते नजर आए।

कार्यक्रम में हर सहपाठी अपनी जीवन-यात्रा की कहानी लेकर आया था। किसी ने संघर्ष और सफलता के अनुभव साझा किए, तो किसी ने बीते वर्षों के अनुभव सुनाए। यात्राएं भले अलग-अलग रहीं, लेकिन सबकी कहानी का आरंभ एक ही जगह से हुआ था—आदर्श जनता इंटर कॉलेज की वह कक्षा।
इस आयोजन की सबसे विशेष बात रही कि यहां किसी की वर्तमान पद या प्रतिष्ठा के आधार पर पहचान नहीं थी। प्रशासनिक अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, शिक्षक, प्रबंधक, पत्रकार और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत सभी सहपाठी उस दिन फिर एक ही बैच के विद्यार्थी और पुराने दोस्त थे।
कार्यक्रम की सफलता में सभी सहपाठियों का सामूहिक सहयोग और आत्मीय सहभागिता रही। आयोजन की व्यवस्थाओं में क्षितिज और राकेश के साथ विनीत चंद्र, आनंद सिंह, अवध नाथ, पवन जायसवाल, राजीव राय, शत्रुघ्न वर्मा, मस्लहुद्दीन खान, महेंद्र वर्मा, लालचंद मौर्य, शील शुक्ला, मनीष सिंह, मोहम्मद शिब्ली, शाहिद, सत्य प्रकाश पांडेय, देवर्षि द्विवेदी, युगल अग्रवाल, विनय श्रीवास्तव, राजन कुमार, जीशान, प्रेम नाथ, मदनी, विजय, अक्षत, सलाम, माबूद, राम कृष्ण मौर्य और संजय धवन सहित सभी सहपाठियों की सक्रिय सहभागिता और सहयोग रहा। सामूहिक प्रयासों ने इस मिलन को एक यादगार अवसर बना दिया।

37 वर्ष बाद हुआ यह मिलन समारोह इस विश्वास के साथ संपन्न हुआ कि समय जीवन की राहें बदल सकता है, लेकिन साझा बचपन और सच्ची दोस्ती की स्मृतियां कभी पुरानी नहीं होतीं।
मयूर रिजॉर्ट्स में उस दिन सचमुच लगा—
1989 की कक्षा फिर सज गई,
पुरानी दोस्ती फिर मुस्कुरा उठी;
जिंदगी आगे बढ़ती रही,
मगर बचपन वहीं ठहरा रहा।
पद बदल गए, शहर बदल गए, जिंदगी बदल गई—
लेकिन दोस्ती आज भी वहीं थी।

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