देहरादून, 20 अगस्त 2026: रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय, देहरादून में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के विश्वविद्यालय जीवन की सहज, सकारात्मक एवं प्रेरणादायी शुरुआत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय “दीक्षारंभ 2026 – विद्यार्थी अभिमुखीकरण कार्यक्रम” का तृतीय एवं अंतिम दिवस आज 20 अगस्त 2026 को लालित्यादित्य प्रेक्षागृह में उत्साहपूर्ण एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। तृतीय दिवस में फैकल्टी ऑफ फार्मेसी, फैकल्टी ऑफ साइंस, फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड सोशल साइंस, फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट तथा फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स के नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, संस्थागत अनुशासन एवं उपलब्ध सुविधाओं से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें संस्कार, राष्ट्रबोध, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास की दिशा में प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारियों, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों एवं प्राध्यापकों ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। माननीय कुलपति डॉ. देश दीपक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश उनके जीवन की एक नई यात्रा का शुभारंभ है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि विश्वविद्यालय जीवन केवल कक्षाओं, परीक्षाओं और डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, कौशल, चरित्र एवं नेतृत्व क्षमता विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम, समय प्रबंधन, नैतिक मूल्यों एवं निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
शैक्षणिक अधिष्ठाता एवं निदेशक, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ, प्रो. मनमोहन गुप्ता ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अकादमिक अनुशासन एवं उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता के संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, समय के सदुपयोग, शिक्षकों के मार्गदर्शन एवं उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जिज्ञासा, प्रश्न पूछने की आदत एवं निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विद्यार्थी जीवन की सफलता की महत्वपूर्ण आधारशिला है।
कार्यक्रम में संस्कृति विभाग के सदस्य एवं अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी एवं वैश्विक संबंध विभाग के सहायक निदेशक श्री रमन कृष्ण किमोठी ने विद्यार्थियों को सुभारती की मूल भावना “राष्ट्र बोध से राष्ट्र भक्ति” से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल करियर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य चरित्र निर्माण एवं जिम्मेदार नागरिक का निर्माण भी है। विद्यार्थियों को राष्ट्र, समाज एवं मानवता के प्रति अपने दायित्वों को समझने तथा अपने ज्ञान एवं प्रतिभा का सकारात्मक उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का विशेष सत्र “राष्ट्र बोध” रहा, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, गौरवशाली इतिहास, राष्ट्रीय एकता, राष्ट्रप्रेम एवं कर्तव्यबोध से जोड़ा गया।
इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री लोकप्रिय चिकित्सालय की निदेशिका डॉ. जीवन आशा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अपने प्रेरणादायी विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, संवेदनशीलता, सेवा भावना, सकारात्मक सोच एवं मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने निर्धारित लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहते हुए निरंतर सीखना चाहिए तथा अपने ज्ञान एवं क्षमताओं का उपयोग समाज एवं मानव सेवा के लिए भी करना चाहिए। उनके विचारों ने विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक जीवन के साथ मानवीय मूल्यों को जोड़ने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की संरचना, शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों, उपलब्ध सुविधाओं तथा उनके लिए उपलब्ध विभिन्न अवसरों की जानकारी भी प्रदान की गई। फैकल्टी ऑफ एजुकेशन द्वारा विश्वविद्यालय के नियम एवं विनियम तथा अनुशासन संबंधी आवश्यक जानकारी दी गई, जबकि मुख्य प्रॉक्टर द्वारा एंटी-रैगिंग जागरूकता के माध्यम से विद्यार्थियों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं रैगिंग-मुक्त शैक्षणिक वातावरण के महत्व से अवगत कराया गया। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की गरिमा बनाए रखने तथा किसी भी अनुचित घटना की स्थिति में तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करने के लिए जागरूक किया गया।
परीक्षा नियंत्रक श्रीमती पूनम कौशिक ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया, परीक्षा संबंधी नियमों एवं महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। वहीं राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के समन्वयक श्री प्रदीप महारा ने विद्यार्थियों को NSS की विभिन्न गतिविधियों एवं सामाजिक सेवा के अवसरों से परिचित कराया तथा सेवा भावना एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को विद्यार्थी जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में उपलब्ध सांस्कृतिक, साहित्यिक, खेलकूद, सामाजिक, रचनात्मक एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए भी प्रोत्साहित किया गया, ताकि उनके आत्मविश्वास, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता एवं समग्र व्यक्तित्व का विकास हो सके।
तृतीय दिवस में फैकल्टी ऑफ फार्मेसी, फैकल्टी ऑफ साइंस, फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड सोशल साइंस, फैकल्टी ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट तथा फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स के नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने विभिन्न सत्रों में सक्रिय सहभागिता की। विद्यार्थियों में अपने नए शैक्षणिक जीवन को लेकर उत्साह, जिज्ञासा एवं सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह अनुभव कराया गया कि वे विश्वविद्यालय के केवल विद्यार्थी नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी प्रतिभा, विचार एवं ऊर्जा विश्वविद्यालय की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
विश्वविद्यालय के रिसर्च विभाग के जॉइंट डायरेक्टर डॉ. संदीप ध्यानी ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने “दीक्षारंभ 2026” के सफल आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले विश्वविद्यालय प्रशासन, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को कार्यक्रम के दौरान प्राप्त मार्गदर्शन एवं अवसरों का सकारात्मक उपयोग करते हुए अपने शैक्षणिक जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर कुलसचिव श्री खालिद हसन, संस्कृति विभाग के सचिव एवं कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग के विभागाध्यक्ष श्री विनय सेमवाल, विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता एवं अनुसंधान निदेशक डॉ. संदीप ध्यानी, कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. इमरान खान, डॉ. प्रतिभा जुयाल, डॉ. पुष्पा ध्यानी, प्रो. नितिका कौशल, राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) के समन्वयक श्री प्रदीप महारा, श्री शुभम, श्री आदित्य, श्री रजत, श्री शरद, श्री राजदीप राणा, श्री विवेक चौहान, श्री सूरज, श्री रवि कांत, बागवानी कर्मचारीगण, कुमारी सपना सहित संस्कृति विभाग के सदस्य, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी एवं नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे।
तीन दिवसीय “दीक्षारंभ 2026” के सफल समापन अवसर पर विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि यह कार्यक्रम उनके विश्वविद्यालय जीवन की केवल औपचारिक शुरुआत नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, संस्कार, आत्मविश्वास, नेतृत्व एवं राष्ट्रबोध के साथ एक नई यात्रा का शुभारंभ है। विद्यार्थियों से अपेक्षा की गई कि वे विश्वविद्यालय में उपलब्ध प्रत्येक अवसर का सकारात्मक उपयोग करते हुए ज्ञान में उत्कृष्ट, व्यवहार में संस्कारित, कार्य में अनुशासित, विचारों में राष्ट्रहितैषी तथा समाज के प्रति संवेदनशील नागरिक के रूप में स्वयं को विकसित करेंगे।
“दीक्षारंभ 2026” के तीनों दिवसों ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं संस्थागत व्यवस्था से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें जीवन के व्यापक उद्देश्यों से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में यह विश्वास और उत्साह उत्पन्न किया कि रास बिहारी बोस सुभारती विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, संस्कार, व्यक्तित्व, नेतृत्व एवं राष्ट्रबोध के साथ अपने भविष्य को आकार देने का एक सशक्त मंच है।
