अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि चढ़ावा अनियमितता प्रकरण के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय इन दिनों सार्वजनिक रूप से कम दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि वह फिलहाल एकांत में रहकर विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद ही वह पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रख सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने चढ़ावा प्रकरण के मुख्य आरोपी टिन्नू यादव का भी जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें उससे ऐसी उम्मीद नहीं थी।

सूत्रों के मुताबिक, करीबी लोगों से बातचीत में चंपत राय ने कहा कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों का दाग लेकर अयोध्या से नहीं जाना चाहते। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन वह अपने ऊपर लगे आरोपों के साथ यहां से विदा नहीं होना चाहते।

बताया जाता है कि 80 वर्षीय चंपत राय तीर्थ क्षेत्र पुरम में रहते हैं। उनके करीबी लोगों का कहना है कि पिछले दिनों में जब कुछ लोग उनका हालचाल जानने पहुंचे तो उन्होंने भगवान श्रीराम की प्रतिमा की ओर इशारा करते हुए भरोसा जताया कि सत्य सामने आएगा और उन पर लगे आरोप भी दूर होंगे।

उधर, चढ़ावा प्रकरण की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां जल्द ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी से भी पूछताछ कर सकती हैं। जांच का फोकस दानराशि की गणना, बैंक में जमा करने की प्रक्रिया, वित्तीय निगरानी व्यवस्था और ट्रस्ट की जवाबदेही पर है। जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि ट्रस्ट और बैंक के बीच दानराशि की गणना, जमा और प्रबंधन को लेकर हुए एमओयू के सभी प्रावधानों का पालन हुआ था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि वित्तीय नियंत्रण की व्यवस्था व्यवहार में कितनी प्रभावी रही और यदि कहीं कोई चूक हुई तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है। फिलहाल एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आने की संभावना है।

वहीं राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों की आंच में झुलसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपतराय व दूसरे ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। इसके कारण इन दोनों ने मंदिर से भी दूरी बना ली है। वहीं मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव पूरी तरह से सक्रिय हैं और व्यवस्था संचालन में सक्रियता बढ़ गई है। इसी कड़ी में यज्ञशाला में प्रतिष्ठित हनुमान जी के विग्रह को मंगलवार को नवनिर्मित अस्थाई मंदिर के स्मारक में पुर्नप्रतिष्ठित कराया गया। इस अस्थाई मंदिर में विराजमान रामलला के स्थान पर एक अखंड ज्योति रखवाई गयी है। इसके कारण हनुमान जी के विग्रह को ज्योति के पीछे स्थापित किया गया है।

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